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Siddharth Saaz
chaand suraj aur baadal dekhkar
chaand suraj aur baadal dekhkar | चाँद, सूरज और बादल देखकर
- Siddharth Saaz
चाँद,
सूरज
और
बादल
देखकर
हँस
रहा
था
एक
पागल
देखकर
मैं
समझता
हूँ
जुनून-ए-इश्क़
भी
दौड़
पड़ता
हूँ
मैं
जंगल
देखकर
वो
शिकारी
पहले
इंसाँ
था
तभी
रो
दिया
था
मुझको
घाइल
देखकर
वो
उठाएगा
नज़र
तो
कोई
भी
डूब
जाएगा
वो
दलदल
देखकर
लम्स
तक
उसके
बदन
का
याद
है
उसकी
याद
आती
है
मख़मल
देखकर
हीरे
तक
के
भाव
कम
होने
लगे
उसकी
वो
चाँदी
की
पायल
देखकर
- Siddharth Saaz
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तमन्ना
है
दिवाली
में
दिया
इक
जल
उठे
ऐसा
जला
दे
फ़ासले
सारे
हमारे
दरमियाँ
जो
हैं
Bhoomi Srivastava
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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उसने
गले
से
हमको
लगाया
तो
रो
पड़े
अपना
बना
के
हाथ
छुड़ाया
तो
रो
पड़े
मैंने
ग़मों
से
कह
तो
दिया
रहना
उम्र
भर
वा'दा
ग़मों
ने
अपना
निभाया
तो
रो
पड़े
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Vikas Sahaj
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बीस
बरस
से
इक
तारे
पर
मन
की
जोत
जगाता
हूँ
दीवाली
की
रात
को
तू
भी
कोई
दिया
जलाया
कर
Majid Ul Baqri
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ये
वो
क़बीला
है
जो
हुस्न
को
ख़ुदा
माने
यहाँ
पे
कौन
तेरी
बात
का
बुरा
माने
इशारा
कर
दिया
है
आपकी
तरफ़
मैंने
ये
बच्चे
पूछ
रहे
थे
कि
बे-वफ़ा
माने
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Kushal Dauneria
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धूप
के
एक
ही
मौसम
ने
जिन्हें
तोड़
दिया
इतने
नाज़ुक
भी
ये
रिश्ते
न
बनाये
होते
Waseem Barelvi
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ये
इंतिज़ार
सहर
का
था
या
तुम्हारा
था
दिया
जलाया
भी
मैं
ने
दिया
बुझाया
भी
Aanis Moin
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दु'आ
करो
कि
सलामत
रहे
मिरी
हिम्मत
ये
इक
चराग़
कई
आँधियों
पे
भारी
है
Waseem Barelvi
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तिरे
बग़ैर
अजब
बज़्म-ए-दिल
का
आलम
है
चराग़
सैंकड़ों
जलते
हैं
रौशनी
कम
है
Shakeel Badayuni
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कहाँ
तो
तय
था
चराग़ाँ
हर
एक
घर
के
लिए
कहाँ
चराग़
मुयस्सर
नहीं
शहर
के
लिए
Dushyant Kumar
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जबकि
मैंने
इश्क़
में
मरने
का
वा'दा
कर
लिया
तब
लगा
मुझको
कि
मैंने
इश्क़
ज़्यादा
कर
लिया
Siddharth Saaz
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बारिश
हो
जाने
के
बाद
भी
मिट्टी
गीली
रहती
है
मैं
तेरे
जाने
के
बाद
भी
तुझ
सेे
बातें
करता
हूँ
Siddharth Saaz
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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वो
कह
रहा
है
मुझको
कभी
भूलना
नहीं
क्यूँँ
कह
रहा
है
ये
कोई
कहने
की
बात
है?
Siddharth Saaz
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वो
मुझ
सेे
लेकर
जाती
दो
बोसे
अपने
माथे
पर
और
मेरे
होंठों
पे
अपना
ज़ायका
छोड़
के
जाती
थी
Siddharth Saaz
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