vo KHvaab talabgaar-e-tamaasha bhi nahin hai | वो ख़्वाब तलबगार-ए-तमाशा भी नहीं है

  - Kabir Ajmal
वोख़्वाबतलबगार-ए-तमाशाभीनहींहै
कहतेहैंकिसीनेउसेदेखाभीनहींहै
पहलीसीवोख़ुशबू-ए-तमन्नाभीनहींहै
इसबारकोईख़ौफ़हवाकाभीनहींहै
उसचाँदकीअंगड़ाईसेरौशनहैंदरबाम
जोपर्दा-ए-शब-रंगपेउभराभीनहींहै
कहतेहैंकिउठनेकोहैअबरस्म-ए-मोहब्बत
औरइसकेसिवाकोईतमाशाभीनहींहै
इसशहरकीपहचानथींवोफूलसीआँखें
अबयूँँहैकिउनआँखोंकाचर्चाभीनहींहै
क्यूँँबामपेआवाज़ोंकाधम्मालहै'अजमल'
इसघरपेतोआसेबकासायाभीनहींहै
  - Kabir Ajmal
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