vo mauj-e-hawa jo abhii bahne ki nahin hai | वो मौज-ए-हवा जो अभी बहने की नहीं है

  - Kabir Ajmal
वोमौज-ए-हवाजोअभीबहनेकीनहींहै
हमजानतेहैंआपसेकहनेकीनहींहै
यूँँख़ुशहोशहर-ए-निगाराँकेदरबाम
येवादी-ए-सफ़्फ़ाकभीरहनेकीनहींहै
काशकोईकोह-ए-निदाहीसेपुकारे
दीवार-ए-सुकूतआपहीढहनेकीनहींहै
क्यूँँअक्स-ए-गुरेज़ाँसेचमकबुझगईदिलकी
येराततोमहताबकेगहनेकीनहींहै
रक़्क़ासा-ए-सहरा-ए-जुनूँभीहैयहीमौज
यकचश्मा-ए-ख़ूँ-नाबसेबहनेकीनहींहै
इकतरफ़ातमाशाहैमुझेशोख़ी-ए-गुफ़्तार
आशुफ़्तगी-ए-'मीर'भीसहनेकीनहींहै
  - Kabir Ajmal
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