बुझतीरगोंमेंनूरबिखरताहुआसामैं
तूफ़ान-ए-नंग-ए-मौजगुज़रताहुआसामैं
हरशबउजालतीहुईभीगीरुतोंकेख़्वाब
औरमिस्ल-ए-अक्स-ए-ख़्वाबबिखरताहुआसामैं
मौज-ए-तलबमेंतैरगयाथाबसएकनाम
फिरयूँँहुआकिजीउठामरताहुआसामैं
इकधुँदसीफ़लकसेउतरतीदिखाईदे
फिरउसमेंअक्सअक्ससँवरताहुआसामैं
दस्त-ए-दुआउठातोउठाउसकेहीहुज़ूर
लेकिनयेक्याउसीसेमुकरताहुआसामैं
अबकेहवाचलेतोबिखरजाऊँदूरतक
लेकिनतिरीगलीमेंठहरताहुआसामैं
मैंबुझगयातोकौनउजालेगातेरारूप
ज़िंदाहूँइसख़यालमेंमरताहुआसामैं
'अजमल'वोनीम-शबकीदुआएँकहाँगईं
इकशोर-ए-आगहीहैबिखरताहुआसामैं