ik tasavvur-e-be-karaan tha aur main | इक तसव्वुर-ए-बे-कराँ था और मैं

  - Kabir Ajmal
इकतसव्वुर-ए-बे-कराँथाऔरमैं
दर्दकासैल-ए-रवाँथाऔरमैं
ग़मकाइकआतिश-फ़िशाँथाऔरमैं
दूरतकगहराधुआँथाऔरमैं
किससेमैंउनकाठिकानापूछता
सामनेख़ालीमकाँथाऔरमैं
मेरेचेहरेसेनुमायाँकौनथा
आइनोंकाइकजहाँथाऔरमैं
इकशिकस्तानावथीउम्मीदकी
एकबहर-ए-बे-कराँथाऔरमैं
जुस्तुजूथीमंज़िल-ए-मौहूमकी
येज़मींथीआसमाँथाऔरमैं
कौनथाजोध्यानसेसुनतामुझे
क़िस्सा-ए-अशुफ़्तगाँथाऔरमैं
हाथमें'अजमल'कोईतेशाथा
अज़्मथाकोह-ए-गिराँथाऔरमैं
  - Kabir Ajmal
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