hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Kumar Vishwas
sakhiyon sang rangne ki dhamki sunkar kya dar jaaunga
sakhiyon sang rangne ki dhamki sunkar kya dar jaaunga | सखियों संग रँगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊँगा
- Kumar Vishwas
सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
- Kumar Vishwas
Download Sher Image
तुम
पर
इक
दिन
मरते
मरते
मर
जाना
है,
दीवाने
को
कहाँ
ख़बर
है
घर
जाना
है
एक
शब्द
तुमको
अंधेरे
का
खौफ़
दिलाकर,
बाद
में
ख़ुद
भी
जान
बूझकर
डर
जाना
है
Read Full
Vishal Singh Tabish
Send
Download Image
54 Likes
तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
Send
Download Image
18 Likes
तेरे
दर
से
जब
उठ
के
जाना
पड़ेगा
ख़ुद
अपना
जनाज़ा
उठाना
पड़ेगा
Khumar Barabankvi
Send
Download Image
35 Likes
ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
22 Likes
डर
है
घर
में
कैसे
बोला
जाएगा
छोड़ो
जो
भी
होगा
देखा
जाएगा
मैं
बस
उसका
चेहरा
पढ़कर
जाऊँगा
मेरा
पेपर
सब
सेे
अच्छा
जाएगा
Read Full
Vishal Singh Tabish
Send
Download Image
84 Likes
मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
Read Full
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
46 Likes
अस्ल
में
पाया
ही
'दानिश'
तब
उसे
जब
उसे
खोने
का
डर
जाता
रहा
Madan Mohan Danish
Send
Download Image
32 Likes
रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
305 Likes
फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
Read Full
Harsh saxena
Send
Download Image
10 Likes
हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
Send
Download Image
2 Likes
Read More
फिर
मिरी
याद
आ
रही
होगी
फिर
वो
दीपक
बुझा
रही
होगी
फिर
मिरे
फेसबुक
पे
आ
कर
वो
ख़ुद
को
बैनर
बना
रही
होगी
अपने
बेटे
का
चूम
कर
माथा
मुझ
को
टीका
लगा
रही
होगी
फिर
उसी
ने
उसे
छुआ
होगा
फिर
उसी
से
निभा
रही
होगी
जिस्म
चादर
सा
बिछ
गया
होगा
रूह
सिलवट
हटा
रही
होगी
फिर
से
इक
रात
कट
गई
होगी
फिर
से
इक
रात
आ
रही
होगी
Read Full
Kumar Vishwas
Download Image
52 Likes
कबूतर
इश्क़
का
उतरे
तो
कैसे?
तुम्हारी
छत
पे
निगरानी
बहुत
है
इरादा
कर
लिया
गर
ख़ुद-कुशी
का
तो
ख़ुद
की
आँख
का
पानी
बहुत
है
Read Full
Kumar Vishwas
Send
Download Image
92 Likes
उसी
की
तरह
मुझे
सारा
ज़माना
चाहे
वो
मिरा
होने
से
ज़्यादा
मुझे
पाना
चाहे
Kumar Vishwas
Send
Download Image
61 Likes
रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
Send
Download Image
48 Likes
राम
होने
में
या
रावण
में
है
अंतर
इतना
एक
दुनिया
को
ख़ुशी
दूसरा
ग़म
देता
है
हम
ने
रावण
को
बरस
दर
बरस
जलाया
है
कौन
है
वो
जो
इसे
फिर
से
जनम
देता
है
Read Full
Kumar Vishwas
Send
Download Image
90 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Politics Shayari
Diwali Shayari
Doctor Shayari
Mood off Shayari
Mayoosi Shayari