nayi zameen naye aasmaañ sanvarte rahen | नई ज़मीन नए आसमाँ सँवरते रहें

  - Kabir Ajmal
नईज़मीननएआसमाँसँवरतेरहें
यहीहैशर्ततोफिरहर्फ़हर्फ़मरतेरहें
यहीसज़ाहैकिलम्होंकीबाज़-गश्तकेबाद
सदीसदीतिरेकूचेमेंबैनकरतेरहें
वोइंक़िलाबलकीरोंसेजोउभरसका
कहाँतलकउसीख़ाकेमेंरंगभरतेरहें
कुछऔरचाहिएदीवानगीकोहद्द-ए-जुनूँ
कुछऔरअरसा-ए-महशरकिहमगुज़रतेरहें
कोईसदाकोईआवाज़ा-ए-जरसहीसही
कोईबहानाकिहमजाँनिसारकरतेरहें
  - Kabir Ajmal
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