आख़िरआख़िरएकग़महीआश्नारहजाएगा
औरवोग़मभीमुझकोइकदिनदेखतारहजाएगा
सोचताहूँअश्क-ए-हसरतहीकरूँँनज़्र-ए-बहार
फिरख़यालआताहैमेरेपासक्यारहजाएगा
अबहवाएँहीकरेंगीरौशनीकाफ़ैसला
जिसदिएमेंजानहोगीवोदियारहजाएगा
आजअगरघरमेंयहीरंग-ए-शब-ए-इशरतरहा
लोगसोजाएँगेदरवाज़ाखुलारहजाएगा
ता-हद-ए-मंज़िलतवाज़ुनचाहिएरफ़्तारमें
जोमुसाफ़िरतेज़-तरआगेबढ़ारहजाएगा
घरकभीउजड़ानहींयेघरकाशजराहैगवाह
हमगएतोआकेकोईदूसरारहजाएगा
रौशनी'महशर'रहेगीरौशनीअपनीजगह
मैंगुज़रजाऊँगामेरानक़्श-ए-पारहजाएगा