apna to KHair zikr kya koi nahin nigaah men | अपना तो ख़ैर ज़िक्र क्या कोई नहीं निगाह में

  - Kabir Ahmad Jaisi
अपनातोख़ैरज़िक्रक्याकोईनहींनिगाहमें
उम्रतमामहोगईछोटेसेइकगुनाहमें
किसकाख़िराम-ए-नाज़थाकौनथाग़मकीराहमें
नूरसाइकचमकउठाक़ल्ब-ए-शब-ए-सियाहमें
कौनसमझसकेउसेरब्त-ए-निहाँकीबातहै
हुस्नकीहरअदामिलीइश्क़केइश्तिबाहमें
तेरीनिगाह-ए-नीम-वाकामतोअपनाकरगई
कैफ़-ए-दवामदेगईकुल्फ़त-ए-गाह-गाहमें
देखोचराग़-ए-आगहीराह-ए-जुनूँमेंबुझगया
अक़्लकेहोशगुमहैंअबएकहीइंतिबाहमें
एकमक़ामहैजहाँएकहैंअक्स-ओ-आइनाइश्क़कोजाकेदेखिएहुस्नकीजल्वा-गाहमें
देखरहीहैआजभीमेरीनिगाह-ए-गर्म-ओ-तेज़
छुपनेकोछुपगएहोतुमपर्दा-ए-मेहर-ओ-माहमें
महफ़िल-ए-ज़ीस्तमें'सबा'होगानज़रकाहालक्या
आगसीजबभड़कउठीक़ल्ब-ए-जुनूँ-पनाहमें
  - Kabir Ahmad Jaisi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy