yuñ to har daagh tujhe ham ne dikhaaya bhi nahin | यूँँ तो हर दाग़ तुझे हम ने दिखाया भी नहीं

  - Kabir Ahmad Jaisi
यूँँतोहरदाग़तुझेहमनेदिखायाभीनहीं
लेकिनदोस्तकोईराज़छुपायाभीनहीं
येतोसचहैकिहक़ीक़तकीतरहयादनहीं
ख़्वाबकीतरहमगरतुझकोभुलायाभीनहीं
क्यूँगलेमिलतेहैंरहरहकेहवादिसमुझसे
मुझपेजोगुज़रीहैवोमैंनेबतायाभीनहीं
कोईबतलाओकरेंकिसतरहअपनोंकीतलाश
ऐसीमंज़िलपेजहाँकोईपरायाभीनहीं
यूँँरहेगर्म-ए-सफ़रआलम-ए-हैरतमें'सबा'
अपनादामनकभीकाँटोंसेबचायाभीनहीं
  - Kabir Ahmad Jaisi
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