vaqt khud-sar hai sadaa apni hi man-maani kare | वक़्त ख़ुद-सर है सदा अपनी ही मन-मानी करे

  - Kabir Ahmad Jaisi
वक़्तख़ुद-सरहैसदाअपनीहीमन-मानीकरे
बहतादरियाआगकरदेआगकोपानीकरे
टूटहीजाएइलाहीयेजुमूद-ए-बे-अमाँ
आगबरसाएफ़लकदरियाहीतुग़्यानीकरे
बच्चोंकीसीख़्वाहिशोंमेंउम्रसारीकटगई
तीरसेचाहाथाज़ख़्मोंकीनिगहबानीकरे
जिसमेंबाक़ीरहगईहैतेरीथोड़ीसीमहक
ज़िंदगीउसएकलम्हेमेंहीज़िंदानीकरे
दश्त-ए-बे-पायाँमेंइकतन्हामुसाफ़िरहूँ'सबा'
जानेमेराहश्रक्याग़ौल-ए-बयाबानीकरे
  - Kabir Ahmad Jaisi
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