kaun jaane hogaa kya ye maajra hone ke ba'ad | कौन जाने होगा क्या ये माजरा होने के बा'द

  - Kabir Ahmad Jaisi
कौनजानेहोगाक्यायेमाजराहोनेकेबा'द
जिस्मफीकापड़गयारंग-ए-क़बाहोनेकेबा'द
अक़्लकीहर्ज़ा-सराईज़ेहनकीआवारगी
मुझकोसबकुछमिलगयातुझसेजुदाहोनेकेबा'द
शुक्रहैफ़ारिग़हुएदेकरहिसाब-ए-ज़िंदगी
एकआँसूबचरहासबकुछअदाहोनेकेबा'द
सारीख़ुशियाँकैसीबे-ताबीसेरुख़्सतहोगईं
लोगमस्जिदसेउठेंजैसेदु'आहोनेकेबा'द
शो'ला-ए-जव्वालाजबतकथेतोथेआतिश-मिज़ाज
ख़ुनकी-ए-अहल-ए-वफ़ाअबहैं'सबा'होनेकेबा'द
  - Kabir Ahmad Jaisi
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