kisi ko paikar-e-mehtaab men jo dhaala tha | किसी को पैकर-ए-महताब में जो ढाला था

  - Kabir Ahmad Jaisi
किसीकोपैकर-ए-महताबमेंजोढालाथा
ख़याल-ओ-ख़्वाबकावोआख़िरीसँभालाथा
हरएकशख़्सपेपरछाईंकाख़यालहुआ
तिरीगलीमेंअजबतरहकाउजालाथा
जानेकिसलिएज़ुल्मतनेउसपेयूरिशकी
वोआफ़्ताबकिजोख़ुदहीढलनेवालाथा
इसीख़तापेहरइकख़ारनेक़दमचू
में
वोएककाँटाहीक्यूँपाँवसेनिकालाथा
कोईबताओकिसूरजकोयेझिझकक्यूँहै
अभीकिरननेतोकोहरेसेसरनिकालाथा
बिला-सबबमुझेयादोंनेसंगसारकिया
सराब-ए-ज़ीस्तसेमैंकबनिकलनेवालाथा
कभीतोहमनेभीख़्वाबोंकेबुततराशेथे
हमारेदिलमेंभीउल्फ़तकाइकशिवालाथा
  - Kabir Ahmad Jaisi
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