hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Jitendra "jeet"
jaan lene hai raaz jab uske
jaan lene hai raaz jab uske | जान लेने है राज़ जब उसके
- Jitendra "jeet"
जान
लेने
है
राज़
जब
उसके
और
करनी
है
ख़ुद-कुशी
मैं
ने
- Jitendra "jeet"
Download Sher Image
हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
Send
Download Image
28 Likes
दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
Send
Download Image
92 Likes
तुम्हारे
बाद
अब
मैं
क्या
करूँँगा
गुज़रती
गाड़ियाँ
देखा
करूँँगा
मेरे
मरने
पे
काफ़ी
लोग
होंगे
मैं
अपनी
मौत
पर
ख़र्चा
करूँँगा
Read Full
Asif Ali
Send
Download Image
25 Likes
लेने
आएगी
मौत
जब
मुझको
मेरे
पहलू
में
आब-ए-ज़मज़म
हो
Amaan Pathan
Send
Download Image
8 Likes
हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
Read Full
Vikram Gaur Vairagi
Send
Download Image
92 Likes
दुनिया
मेरी
बला
जाने
महँगी
है
या
सस्ती
है
मौत
मिले
तो
मुफ़्त
न
लूँ
हस्ती
की
क्या
हस्ती
है
Fani Badayuni
Send
Download Image
29 Likes
ज़िन्दगी
इक
हादसा
है
और
कैसा
हादसा
मौत
से
भी
ख़त्म
जिसका
सिलसिला
होता
नहीं
Jigar Moradabadi
Send
Download Image
39 Likes
शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
Read Full
Aman G Mishra
Send
Download Image
2 Likes
ये
भी
अच्छा
हुआ
मौत
ने
आकर
हमको
बचा
लिया
वरना
हालत
ऐसी
थी,
हम
शायर
भी
हो
सकते
थे
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
39 Likes
उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
Read More
वो
क्यूँँ
चाहे
अच्छा
मेरा
जिस
सेे
हुआ
है
झगड़ा
मेरा
अब
ग़ैरों
के
हाथों
में
है
जिस
दिल
पर
था
क़ब्ज़ा
मेरा
उसकी
माँग
सजाने
का
अब
टूट
गया
है
सपना
मेरा
जिसने
उसकी
माँग
भरी
है
दोस्त
हुआ
करता
था
मेरा
यार
ज़रा
भी
शर्म
न
आई
खाकर
तुझको
हिस्सा
मेरा
जीत
न
पाता
जिस
लड़की
से
पड़
जाता
है
पाला
मेरा
Read Full
Jitendra "jeet"
Download Image
2 Likes
सबको
जीने
का
यूँँ
ढब
नहीं
आएगा
आना
जब
चाहिए
तब
नहीं
आएगा
व्यर्थ
ही
जाएगा
राह
तकना
तेरा
जो
गया
सो
गया
अब
नहीं
आएगा
Read Full
Jitendra "jeet"
Send
Download Image
1 Like
है
मिली
जो
सज़ा
आशिक़ी
के
लिए
कम
पड़ी
है
मिरी
ज़िन्दगी
के
लिए
क्या
ज़रूरत
पड़ी
हिज्र
की
ऐ
ख़ुदा
मौत
काफ़ी
नहीं
दिल-लगी
के
लिए
तीरगी
में
कटी
उम्र
बस
इसलिए
की़मतें
थीं
नहीं
रौशनी
के
लिए
दोस्त
बनकर
गले
से
लगे
थे
कभी
आज
मशहूर
हैं
दुश्मनी
के
लिए
दर्द
आँसू
उदासी
ग़म-ए-हिज्र
है
और
क्या
चाहिए
शा'इरी
के
लिए
Read Full
Jitendra "jeet"
Download Image
3 Likes
रो
रो
के
खो
गई
है
मेरी
आँख
की
नमी
अब
तो
हमारी
आँख
में
दरिया
नहीं
रहा
Jitendra "jeet"
Send
Download Image
2 Likes
गीत
मुक्तक
सभी
वो
भुलाए
गए
होंठों
तक
आए
पर
जो
न
गाए
गए
तब
से
आँखों
का
नींदों
से
नाता
नहीं
जबसे
गोदी
में
सर
रख
सुलाए
गए
Read Full
Jitendra "jeet"
Send
Download Image
1 Like
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Mahatma Gandhi Shayari
Rahbar Shayari
Friendship Shayari
Gham Shayari
Tevar Shayari