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Jitendra "jeet"
ro ro ke kho gaii hai meri aankh ki nami
ro ro ke kho gaii hai meri aankh ki nami | रो रो के खो गई है मेरी आँख की नमी
- Jitendra "jeet"
रो
रो
के
खो
गई
है
मेरी
आँख
की
नमी
अब
तो
हमारी
आँख
में
दरिया
नहीं
रहा
- Jitendra "jeet"
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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`तू
मेरे
पास
आ
कर
बैठ
मुझ
सेे
बात
कर
ऐ
दोस्त
ये
मुमकिन
है
कोई
दरिया
ख़राबों
से
निकल
आए
Siddharth Saaz
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दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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कभी
दरिया
में
जिनकी
कश्तियाँ
थी
वही
अब
साहिलों
पे
रो
रहे
हैं
Siddharth Saaz
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पा
के
तूफ़ां
का
इशारा
दरिया
तोड़
देता
है
किनारा
दरिया
Abdul Mannan Tarzi
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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मुझ
सेे
अक्सर
जो
बहने
की
कहता
रहता
है
इन
आँखों
के
नीचे
कोई
दरिया
रहता
है
तुमने
कैसे
सोच
लिया
महफ़िल
में
तन्हा
हूँ
साथ
हमारे
यादों
का
इक
पहरा
रहता
है
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Jitendra "jeet"
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उसने
तो
इक
हद
तक
जाना
था
मुझको
जिस
हद
में
रह
उसने
पाना
था
मुझको
मैं
तो
नादाँ
था
जानू
भी
तो
कैसे
तुम
को
तो
आकर
समझाना
था
मुझको
उसने
ही
तोड़ा
था
फिर
ये
दिल
मेरा
जिसने
इक
दिन
सब
कुछ
माना
था
मुझको
अंतिम
वादे
की
ख़ातिर
ज़िंदा
हूँ
मैं
पहले
वादे
में
मर
जाना
था
मुझको
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Jitendra "jeet"
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हमारे
वास्ते
दिल
में
मोहब्बत
गर
नहीं
तेरे
बताकर
एक
सच
हमको
भले
बर्बाद
कर
लेना
ज़रा
कुछ
देर
तो
ठहरो
अभी
साँसें
मेरी
चलतीं
मोहब्बत
जिस
सेे
करते
हो
हमारे
बाद
कर
लेना
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Jitendra "jeet"
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घर
में
आग
लगाने
वाले
झूठा
प्यार
जताने
वाले
शर्म
नहीं
आती
है
तुझको
मेरे
हक़
को
खाने
वाले
गिरगिट
जैसे
रंग
बदलते
लहजा
तौर
सिखाने
वाले
काम
भला
तू
क्यूँ
करता
है
मुझ
सेे
गाली
खाने
वाले
तलवे
नईं
चाटा
करते
हैं
ख़ुदस
नाम
कमाने
वाले
अपनी
आँखें
नीचे
रखले
मुझ
सेे
आँख
मिलाने
वाले
ग़म
का
तुझको
ज्ञान
नहीं
है
झूठा
दर्द
दिखाने
वाले
मुझ
सेे
लड़ने
से
पहले
तू
तेवर
देख
पुराने
वाले
जा
पहले
इंसान
तो
बन
ले
ख़ुद
को
ख़ुदा
बताने
वाले
अब
अपनी
औक़ात
में
रहना
मेरा
मुँह
खुलवाने
वाले
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Jitendra "jeet"
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तुमको
हमारी
याद
का
सदक़ा
नहीं
रहा
तबसे
हमारा
हाल
भी
अच्छा
नहीं
रहा
महँगा
हुआ
है
सब
यहाँ
इक
जान
छोड़कर
कुछ
भी
हमारे
देश
में
सस्ता
नहीं
रहा
हमको
भी
हो
गई
है
मोहब्बत
किसी
से
फिर
वो
इश्क़
आख़िरी
भी
हमारा
नहीं
रहा
रो
रो
के
खो
गई
है
मेरी
आँख
की
नमी
अब
तो
हमारी
आँख
में
दरिया
नहीं
रहा
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Jitendra "jeet"
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