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Jitendra "jeet"
vo kyun chahe achha meraa
vo kyun chahe achha meraa | वो क्यूँँ चाहे अच्छा मेरा
- Jitendra "jeet"
वो
क्यूँँ
चाहे
अच्छा
मेरा
जिस
सेे
हुआ
है
झगड़ा
मेरा
अब
ग़ैरों
के
हाथों
में
है
जिस
दिल
पर
था
क़ब्ज़ा
मेरा
उसकी
माँग
सजाने
का
अब
टूट
गया
है
सपना
मेरा
जिसने
उसकी
माँग
भरी
है
दोस्त
हुआ
करता
था
मेरा
यार
ज़रा
भी
शर्म
न
आई
खाकर
तुझको
हिस्सा
मेरा
जीत
न
पाता
जिस
लड़की
से
पड़
जाता
है
पाला
मेरा
- Jitendra "jeet"
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हर
गीत
में
हर
बार
गाऊँगा
तुझे
अपनी
ग़ज़ल
में
गुनगुनाऊँगा
तुझे
तू
ईद
है
और
तू
ही
दीवाली
मेरी
मैं
हर
बरस
यूँँही
मनाऊँगा
तुझे
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Krishnakant Kabk
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गले
में
उस
के
ख़ुदा
की
अजीब
बरकत
है
वो
बोलता
है
तो
इक
रौशनी
सी
होती
है
Bashir Badr
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दूर
तक
छाए
थे
बादल
और
कहीं
साया
न
था
इस
तरह
बरसात
का
मौसम
कभी
आया
न
था
Qateel Shifai
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कुछ
एक
की
हम
जैसी
क़िस्मत
होती
है
बाकी
सब
की
अच्छी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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प्यास
जहाँ
की
एक
बयाबाँ
तेरी
सख़ावत
शबनम
है
पी
के
उठा
जो
बज़्म
से
तेरी
और
भी
तिश्ना-काम
उठा
Ali Sardar Jafri
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तुम्हारी
राह
में
मिट्टी
के
घर
नहीं
आते
इसलिए
तो
तुम्हें
हम
नज़र
नहीं
आते
Waseem Barelvi
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रहने
को
सदा
दहर
में
आता
नहीं
कोई
तुम
जैसे
गए
ऐसे
भी
जाता
नहीं
कोई
Kaifi Azmi
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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चारा-गर
तो
तभी
बचा
पाएँगे
ना
चारा-गर
की
जान
बचाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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जानते
हो
कि
तुम
ज़िन्दगी
हो
मेरी
तुम
ग़ज़ल
गीत
और
शा'इरी
हो
मेरी
वक़्त
रहते
उठा
लीजिए
फोन
को
क्या
पता
कॉल
ये
आख़िरी
हो
मेरी
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Jitendra "jeet"
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हम
नहीं
थे
तेरे
दुश्मनों
में
तूने
समझा
नहीं
दोस्तों
में
वो
जो
महफ़िल
में
तन्हा
नहीं
था
कैसे
रोता
है
तन्हाइयों
में
रक़्स
करता
है
धड़कन
में
ऐसे
इक
तवायफ़
करे
घुँघरुओं
में
ख़ुद-कुशी
भी
नहीं
कर
सके
वो
जो
बंधे
हैं
कई
बंधनों
में
जिसने
थोपे
हुए
को
न
माना
उसकी
गिनती
हुई
सरफिरों
में
कितनो
हिस्सों
में
मैं
बँट
गया
हूँ
टूटकर
देखा
है
आइनों
में
आज
उनको
ज़रूरत
मेरी
जो
गिन
रहे
थे
मुझे
पागलों
में
दर्द
को
मेरे
कैसे
समझता
वो
जो
बैठा
नहीं
शायरों
में
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Jitendra "jeet"
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इतना
कह
दो
तुम्हें
अब
मुहब्बत
नहीं
बे-वफ़ा
होने
की
फिर
ज़रूरत
नहीं
तेरे
जाने
पे
कर
लेनी
है
ख़ुद-कुशी
अब
मुझे
ख़ुदस
कोई
रफ़ाक़त
नहीं
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Jitendra "jeet"
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जान
लेने
है
राज़
जब
उसके
और
करनी
है
ख़ुद-कुशी
मैं
ने
Jitendra "jeet"
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लिखने
बैठा
है
उदासी
पर
कोई
ग़ज़लें
हो
रहे
हैं
मौत
के
आसार
कमरे
में
Jitendra "jeet"
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