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Jitendra "jeet"
hai mili jo saza aashiqi ke li.e
hai mili jo saza aashiqi ke li.e | है मिली जो सज़ा आशिक़ी के लिए
- Jitendra "jeet"
है
मिली
जो
सज़ा
आशिक़ी
के
लिए
कम
पड़ी
है
मिरी
ज़िन्दगी
के
लिए
क्या
ज़रूरत
पड़ी
हिज्र
की
ऐ
ख़ुदा
मौत
काफ़ी
नहीं
दिल-लगी
के
लिए
तीरगी
में
कटी
उम्र
बस
इसलिए
की़मतें
थीं
नहीं
रौशनी
के
लिए
दोस्त
बनकर
गले
से
लगे
थे
कभी
आज
मशहूर
हैं
दुश्मनी
के
लिए
दर्द
आँसू
उदासी
ग़म-ए-हिज्र
है
और
क्या
चाहिए
शा'इरी
के
लिए
- Jitendra "jeet"
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उम्र
से
मेरी
फ़नकारी
को
मत
आँको
उस्तादों
से
बेहतर
ग़ज़लें
कहता
हूँ
Harsh saxena
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मिल
गए
थे
एक
बार
उस
के
जो
मेरे
लब
से
लब
उम्र
भर
होंटों
पे
अपने
मैं
ज़बाँ
फेरा
किया
Jurat Qalandar Bakhsh
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इश्क़
को
एक
उम्र
चाहिए
और
उम्र
का
कोई
ए'तिबार
नहीं
Jigar Barelvi
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जो
नासमझ
हैं
उठाते
हैं
ज़िन्दगी
के
मज़े
समझने
वाले
तो
बस
उम्र
भर
समझते
हैं
Amit Bajaj
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उम्र
भर
साँप
से
शर्मिंदा
रहे
ये
सुन
कर
जब
से
इंसान
को
काटा
है
तो
फन
दुखता
है
Munawwar Rana
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काँटों
से
दिल
लगाओ
जो
ता-उम्र
साथ
दें
फूलों
का
क्या
जो
साँस
की
गर्मी
न
सह
सकें
Akhtar Shirani
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उम्र
ये
मेरी
सिर्फ़
लबादा
मेरे
खद
ओ
ख़ाल
का
है
मेरा
दिल
तो
मुश्किल
से
कुछ
सोलह
सतरह
साल
का
है!
Vishal Bagh
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एक
रिश्ता
जिसे
मैं
दे
न
सका
कोई
नाम
एक
रिश्ता
जिसे
ता-उम्र
निभाए
रक्खा
Aks samastipuri
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खिलाड़ी
देवकीनंदन
के
जैसा
सामने
हो
तो
तजुर्बा
लाख
हो
शकुनी
भी
चौसर
हार
जाते
हैं
shashwat singh darpan
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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इक
ज़रा
सी
बात
पे
झगड़ा
हुआ
छोड़
कर
के
वो
गया
रोता
हुआ
ये
उदासी
अब
मुझे
खा
जाएगी
रो
पड़ा
इक
शख़्स
ये
कहता
हुआ
रौंदा
जाऊँगा
किसी
पाँव
तले
फूल
हूँ
मैं
डाल
से
टूटा
हुआ
आँख
में
आँसू
मेरी
भर
आए
हैं
याद
आया
वक़्त
जो
गुज़रा
हुआ
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Jitendra "jeet"
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एक
सरिता
ने
आश्रय
था
माँगा
मगर
हम
तो
शिव
भी
नहीं
जो
जटा
दे
सकें
हम
स्वयं
ही
तो
कानन
में
विचरण
करें
कोई
घर
हो
तो
उसका
पता
दे
सकें
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Jitendra "jeet"
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ख़ुद
पे
जो
कर
रहा
चाँद
गर
नाज
तो
वो
सुंदर
तो
है
पर
सब
सेे
प्यारा
नहीं
Jitendra "jeet"
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है
मिली
जो
सज़ा
आशिक़ी
के
लिए
कम
पड़ी
है
मिरी
ज़िन्दगी
के
लिए
Jitendra "jeet"
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तुमको
हमारी
याद
का
सदक़ा
नहीं
रहा
तबसे
हमारा
हाल
भी
अच्छा
नहीं
रहा
महँगा
हुआ
है
सब
यहाँ
इक
जान
छोड़कर
कुछ
भी
हमारे
देश
में
सस्ता
नहीं
रहा
हमको
भी
हो
गई
है
मोहब्बत
किसी
से
फिर
वो
इश्क़
आख़िरी
भी
हमारा
नहीं
रहा
रो
रो
के
खो
गई
है
मेरी
आँख
की
नमी
अब
तो
हमारी
आँख
में
दरिया
नहीं
रहा
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Jitendra "jeet"
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