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Jitendra "jeet"
hai mili jo saza aashiqi ke li.e
hai mili jo saza aashiqi ke li.e | है मिली जो सज़ा आशिक़ी के लिए
- Jitendra "jeet"
है
मिली
जो
सज़ा
आशिक़ी
के
लिए
कम
पड़ी
है
मिरी
ज़िन्दगी
के
लिए
- Jitendra "jeet"
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हम
एक
रात
हुए
थे
क़रीब
और
क़रीब
फिर
उसके
बाद
का
क़िस्सा
गुनाह
जैसा
है
Aks samastipuri
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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मिलेगी
क़ैद
से
कैसे
रिहाई
कौन
सोचेगा
यहाँ
तेरे
सिवा
तेरी
भलाई
कौन
सोचेगा
ज़माने
भर
का
तू
सोचेगा
तो
फिर
तेरे
बारे
में
मुझे
तू
ही
बता
दे
मेरे
भाई,
कौन
सोचेगा?
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Siddharth Saaz
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जुर्म
में
शामिल
रहेंगे
खिड़कियाँ,
दीवार,
छत
और
फिर
औरत
की
अस्मत
कुंडियाँ
ले
जाएंगी
Ravi 'VEER'
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तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
Fahmi Badayuni
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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कोई
समझे
तो
एक
बात
कहूँ
इश्क़
तौफ़ीक़
है
गुनाह
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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इक
ज़रा
सी
बात
पे
झगड़ा
हुआ
छोड़
कर
के
वो
गया
रोता
हुआ
ये
उदासी
अब
मुझे
खा
जाएगी
रो
पड़ा
इक
शख़्स
ये
कहता
हुआ
रौंदा
जाऊँगा
किसी
पाँव
तले
फूल
हूँ
मैं
डाल
से
टूटा
हुआ
आँख
में
आँसू
मेरी
भर
आए
हैं
याद
आया
वक़्त
जो
गुज़रा
हुआ
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Jitendra "jeet"
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एक
तस्वीर
जो
साथ
में
थी
तेरे
मैं
बहुत
रोया
उसको
जलाते
हुए
Jitendra "jeet"
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जो
नहीं
यार
था
हो
गया
है
ये
मिरे
साथ
क्या
हो
गया
है
और
कोई
नहीं
है
मिरा
अब
दर्द
से
वास्ता
हो
गया
है
है
बहुत
डर
मुझे
टूटने
का
दिल
मिरा
आइना
हो
गया
है
इश्क़
में
अब
सभी
हैं
गुज़रते
क्या
बदन
रास्ता
हो
गया
है
इश्क़
में
जीत
कर
फिर
मिला
क्या
यार
ही
जब
जुदा
हो
गया
है
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Jitendra "jeet"
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उसने
भी
तोड़ा
होता
गर
दिल
मेरा
तो
फिर
घर
जाके
मर
जाना
था
मुझको
Jitendra "jeet"
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गीत
मुक्तक
सभी
वो
भुलाए
गए
होंठों
तक
आए
पर
जो
न
गाए
गए
तब
से
आँखों
का
नींदों
से
नाता
नहीं
जबसे
गोदी
में
सर
रख
सुलाए
गए
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Jitendra "jeet"
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