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Jitendra "jeet"
geet muktak sabhi vo bhul
geet muktak sabhi vo bhul | गीत मुक्तक सभी वो भुलाए गए
- Jitendra "jeet"
गीत
मुक्तक
सभी
वो
भुलाए
गए
होंठों
तक
आए
पर
जो
न
गाए
गए
तब
से
आँखों
का
नींदों
से
नाता
नहीं
जबसे
गोदी
में
सर
रख
सुलाए
गए
- Jitendra "jeet"
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शायद
कोई
भूल
हुई
हम
से
भारी
सारे
दुख
मेरे
हिस्से
में
आए
हैं
तेरे
घर
ख़ुशियों
की
बारिश
होनी
है
मेरे
घर
में
ग़म
के
बादल
छाए
हैं
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Jitendra "jeet"
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साथ
उसके
खड़ा
तो
ख़सारा
हुआ
आशिक़ी
में
पड़ा
तो
ख़सारा
हुआ
तोड़कर
दिल
मिरा
तुम
गईं
छोड़कर
ज़िंदगी
से
लड़ा
तो
ख़सारा
हुआ
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Jitendra "jeet"
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पहले
तो
याद
का
मसअला
है
ज़ख़्म
तो
बाद
का
मसअला
है
शायरों
पर
ग़ज़ल
कह
रहे
हो
शा'इरी
दाद
का
मसअला
है
हम
तेरे
जाल
में
फँस
गए
हैं
आगे
सय्याद
का
मसअला
है
पहले
तुम
हारना
सीख
लेते
जीत
तो
बाद
का
मसअला
है
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Jitendra "jeet"
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मजबूरियों
के
दौर
में
रिश्ते
बदल
गए
आँसू
वो
तेरी
आँख
के
छाले
बदल
गए
सबने
मिलाए
हाथ
थे
छाँओं
के
दौर
में
सर
पे
पड़ी
जो
धूप
तो
साए
बदल
गए
कैसे
खुलेंगी
बाप
के
कर्जे
की
बेड़ियाँ
लागी
हवा
जो
शहर
की
बेटे
बदल
गए
मैं
जीतने
की
ओर
था
ऐसा
हुआ
मगर
फेंके
जो
मैंने
खेल
में
पासे
बदल
गए
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Jitendra "jeet"
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क्या
ज़रूरत
पड़ी
हिज्र
की
ऐ
ख़ुदा
मौत
काफ़ी
नहीं
दिल-लगी
के
लिए
Jitendra "jeet"
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