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shashwat singh darpan
khilaadi devkinandan ke jaisa saamne ho to
khilaadi devkinandan ke jaisa saamne ho to | खिलाड़ी देवकीनंदन के जैसा सामने हो तो
- shashwat singh darpan
खिलाड़ी
देवकीनंदन
के
जैसा
सामने
हो
तो
तजुर्बा
लाख
हो
शकुनी
भी
चौसर
हार
जाते
हैं
- shashwat singh darpan
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चेहरों
को
पैरों
से
कुचल
कर
आगे
बढ़
जाना
जीत
इसी
को
कहते
हैं
तो
फिर
मैं
हार
गया
Hasan Shahnawaz Zaidi
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खोए
खोए
से
रहते
हो
यारा
दिल-विल
हार
गए
क्या
shaan manral
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ज़माना
इश्क़
के
मारों
को
मात
क्या
देगा
दिलों
के
खेल
में
ये
जीत
हार
कुछ
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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वो
मिरी
बाहों
में
बे-फ़िक्र
मुलव्विस
हुई
है
कब्र
पे
हार
कोई
फूलों
का
रक्खा
हुआ
है
Raj
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हर
दिन
ही
मोहब्बत
को
पाने
की
लड़ाई
में
जो
हार
नहीं
सकता
वो
जीत
नहीं
सकता
Hasan Raqim
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न
करो
बहस
हार
जाओगी
हुस्न
इतनी
बड़ी
दलील
नहीं
Jaun Elia
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मैं
सच
कहूँगी
मगर
फिर
भी
हार
जाऊँगी
वो
झूट
बोलेगा
और
ला-जवाब
कर
देगा
Parveen Shakir
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वाक़िफ़
कहाँ
ज़माना
हमारी
उड़ान
से
वो
और
थे
जो
हार
गए
आसमान
से
Faheem Jogapuri
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दोनों
जहान
तेरी
मोहब्बत
में
हार
के
वो
जा
रहा
है
कोई
शब-ए-ग़म
गुज़ार
के
Faiz Ahmad Faiz
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इसी
जगह
इसी
दिन
तो
हुआ
था
ये
एलान
अँधेरे
हार
गए
ज़िंदाबाद
हिन्दोस्तान
Javed Akhtar
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इन
अँधेरों
की
आशिक़ी
मुझ
सेे
छीन
लेगी
ये
रौशनी
मुझ
सेे
बंद
की
अपनी
आँख
तब
जा
कर
उसकी
बंद-ए-क़बा
खुली
मुझ
सेे
मीर
जी
हँस
के
बात
करती
है
पंखुड़ी
इक
गुलाब
सी
मुझ
सेे
लोग
इतने
मरे
मेरे
अंदर
लाश
गिनते
नहीं
बनी
मुझ
सेे
राम
कह
कर
के
बात
करती
है
ख़्वाब
में
मेरी
जानकी
मुझ
सेे
होंगे
शायर
बहुत
मगर
दर्पन
जानी
जाएगी
ये
सदी
मुझ
सेे
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shashwat singh darpan
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अर्जुन
को
सोचना
है
लड़ेगा
वो
या
नहीं
गिरधर
ने
ऐसे
मोड़
पे
की
अपनी
बात
ख़त्म
shashwat singh darpan
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और
भी
लोग
उसपे
मरते
हैं
फूल
के
पास
चंद
भवरे
हैं
तुझको
ही
इश्क़
की
नहीं
है
ख़बर
वरना
तो
शहर
भर
में
चर्चे
हैं
रूठ
जाओ
के
रूठने
वाले
रूठने
से
भी
मान
जाते
हैं
ज़हन-ओ-दिल
में
ख़याल
हैं
तेरे
जैसे
ज़िंदान
में
परिंदे
हैं
तू
किसी
और
को
मय्यसर
है
हम
तेरी
आरज़ू
से
लिपटे
हैं
फिर
न
जाने
मिलोगे
कब
हम
सेे
आओ
तस्वीर
खींच
लेते
हैं
एक
दर्पन
है
दायरा
इनका
अक्स
तेरे
यहीं
भटकते
हैं
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shashwat singh darpan
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माँ
बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टँग
कर
मर
जाना
था
shashwat singh darpan
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जाने
किसकी
कमी
है
जो
मुझको
सबके
होने
पे
और
खलती
है
shashwat singh darpan
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