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shashwat singh darpan
maa baba ka soch ke har dam ruk jaata hooñ varna to
maa baba ka soch ke har dam ruk jaata hooñ varna to | माँ बाबा का सोच के हर दम रुक जाता हूँ वरना तो
- shashwat singh darpan
माँ
बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टँग
कर
मर
जाना
था
- shashwat singh darpan
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राम
भी
हैं
कृष्ण
भी
हैं
और
भोलेनाथ
हैं
माँ
तुम्हारे
साथ
हैं
तो
सब
तुम्हारे
साथ
हैं
Tanoj Dadhich
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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कमाता
हूँ
मैं
कितना
सोच
लेना
बाद
में
ये
सब
अभी
तो
बस
यही
काफ़ी
है
माँ
के
पास
रहता
हूँ
Tanoj Dadhich
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माँ
की
दु'आ
न
बाप
की
शफ़क़त
का
साया
है
आज
अपने
साथ
अपना
जनम
दिन
मनाया
है
Anjum Saleemi
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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सबको
बस
पानी
पीने
से
मतलब
है
बस
माँ
को
चिंता
है
मटका
भरने
की
Tanoj Dadhich
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तुम
जितना
तो
कोई
मुझको
ख़ास
नहीं
लेकिन
फिर
भी
क्यूँ
तुमको
विश्वास
नहीं
मुझ
सेे
बेहतर
लड़का
तो
मिल
जाएगा
लेकिन
मेरी
माँ
से
बेहतर
सास
नहीं
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Tanoj Dadhich
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आज
फिर
माँ
मुझे
मारेगी
बहुत
रोने
पर
आज
फिर
गाँव
में
आया
है
खिलौने
वाला
Nawaz Zafar
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माँ
के
आँसू
को
समझता
हूँ
मुक़द्दस
इतना
बस
उन्हें
चूम
ले
अफ़ज़ल
तो
वज़ू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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जाने
किसकी
कमी
है
जो
मुझको
सबके
होने
पे
और
खलती
है
shashwat singh darpan
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इन
अँधेरों
की
आशिक़ी
मुझ
सेे
छीन
लेगी
ये
रौशनी
मुझ
सेे
बंद
की
अपनी
आँख
तब
जा
कर
उसकी
बंद-ए-क़बा
खुली
मुझ
सेे
मीर
जी
हँस
के
बात
करती
है
पंखुड़ी
इक
गुलाब
सी
मुझ
सेे
लोग
इतने
मरे
मेरे
अंदर
लाश
गिनते
नहीं
बनी
मुझ
सेे
राम
कह
कर
के
बात
करती
है
ख़्वाब
में
मेरी
जानकी
मुझ
सेे
होंगे
शायर
बहुत
मगर
दर्पन
जानी
जाएगी
ये
सदी
मुझ
सेे
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shashwat singh darpan
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ये
दुनिया
एक
दोज़ख़
है
जहाँ
पर
कहीं
से
लोग
मर
कर
आ
रहे
हैं
shashwat singh darpan
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और
भी
लोग
उसपे
मरते
हैं
फूल
के
पास
चंद
भवरे
हैं
तुझको
ही
इश्क़
की
नहीं
है
ख़बर
वरना
तो
शहर
भर
में
चर्चे
हैं
रूठ
जाओ
के
रूठने
वाले
रूठने
से
भी
मान
जाते
हैं
ज़हन-ओ-दिल
में
ख़याल
हैं
तेरे
जैसे
ज़िंदान
में
परिंदे
हैं
तू
किसी
और
को
मय्यसर
है
हम
तेरी
आरज़ू
से
लिपटे
हैं
फिर
न
जाने
मिलोगे
कब
हम
सेे
आओ
तस्वीर
खींच
लेते
हैं
एक
दर्पन
है
दायरा
इनका
अक्स
तेरे
यहीं
भटकते
हैं
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shashwat singh darpan
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खिलाड़ी
देवकीनंदन
के
जैसा
सामने
हो
तो
तजुर्बा
लाख
हो
शकुनी
भी
चौसर
हार
जाते
हैं
shashwat singh darpan
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