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shashwat singh darpan
ye duniya ek dozakh hai jahaan par
ye duniya ek dozakh hai jahaan par | ये दुनिया एक दोज़ख़ है जहाँ पर
- shashwat singh darpan
ये
दुनिया
एक
दोज़ख़
है
जहाँ
पर
कहीं
से
लोग
मर
कर
आ
रहे
हैं
- shashwat singh darpan
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मैं
सुख़न
में
हूँ
उस
जगह
कि
जहाँ
साँस
लेना
भी
शा'इरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
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एक
तरफ़
है
पूरी
दुनिया
एक
तरफ़
है
मेरा
घर
लेकिन
तुमको
बतला
दूँ
मैं
दुनिया
से
है
अच्छा
घर
सब
कमरों
की
दीवारों
पर
तस्वीरें
हैं
बस
तेरी
मुझ
सेे
ज़ियादा
तो
लगता
है
जानेमन
ये
तेरा
घर
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Tanoj Dadhich
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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दुनिया
ने
बोला
के
तुम
सेे
नहीं
होगा
अच्छा
है
मैं
थोड़ा
ऊँचा
सुनता
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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जहाँ
से
जी
न
लगे
तुम
वहीं
बिछड़
जाना
मगर
ख़ुदा
के
लिए
बे-वफ़ाई
न
करना
Munawwar Rana
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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इन
अँधेरों
की
आशिक़ी
मुझ
सेे
छीन
लेगी
ये
रौशनी
मुझ
सेे
बंद
की
अपनी
आँख
तब
जा
कर
उसकी
बंद-ए-क़बा
खुली
मुझ
सेे
मीर
जी
हँस
के
बात
करती
है
पंखुड़ी
इक
गुलाब
सी
मुझ
सेे
लोग
इतने
मरे
मेरे
अंदर
लाश
गिनते
नहीं
बनी
मुझ
सेे
राम
कह
कर
के
बात
करती
है
ख़्वाब
में
मेरी
जानकी
मुझ
सेे
होंगे
शायर
बहुत
मगर
दर्पन
जानी
जाएगी
ये
सदी
मुझ
सेे
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shashwat singh darpan
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अर्जुन
को
सोचना
है
लड़ेगा
वो
या
नहीं
गिरधर
ने
ऐसे
मोड़
पे
की
अपनी
बात
ख़त्म
shashwat singh darpan
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और
भी
लोग
उसपे
मरते
हैं
फूल
के
पास
चंद
भवरे
हैं
तुझको
ही
इश्क़
की
नहीं
है
ख़बर
वरना
तो
शहर
भर
में
चर्चे
हैं
रूठ
जाओ
के
रूठने
वाले
रूठने
से
भी
मान
जाते
हैं
ज़हन-ओ-दिल
में
ख़याल
हैं
तेरे
जैसे
ज़िंदान
में
परिंदे
हैं
तू
किसी
और
को
मय्यसर
है
हम
तेरी
आरज़ू
से
लिपटे
हैं
फिर
न
जाने
मिलोगे
कब
हम
सेे
आओ
तस्वीर
खींच
लेते
हैं
एक
दर्पन
है
दायरा
इनका
अक्स
तेरे
यहीं
भटकते
हैं
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shashwat singh darpan
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जाने
किसकी
कमी
है
जो
मुझको
सबके
होने
पे
और
खलती
है
shashwat singh darpan
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खिलाड़ी
देवकीनंदन
के
जैसा
सामने
हो
तो
तजुर्बा
लाख
हो
शकुनी
भी
चौसर
हार
जाते
हैं
shashwat singh darpan
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