jahaan tum jalva-gar hote vahaañ par toor ho jaata | जहाँ तुम जल्वा-गर होते वहाँ पर तूर हो जाता

  - Jalal Aarif
जहाँतुमजल्वा-गरहोतेवहाँपरतूरहोजाता
ज़मींकाज़र्राज़र्रानूरसेमामूरहोजाता
मैंतुझकोदेखकरमस्तीमेंऐसाचूरहोजाता
किदुनियाक्याहैअपनेआपसेभीदूरहोजाता
ग़नीमतहैउचटतीहीनज़रउनकीपड़ीमुझपर
मैंक्याकरतानज़रकावारअगरभरपूरहोजाता
ज़रासीजुरअत-ए-किरदारभीहोतीअगरहममें
ज़मानारुख़बदलनेकेलिएमजबूरहोजाता
फ़क़तशोहरतनहींहैमक़्सद-ए-शेर-ओ-सुख़न'आरिफ़'
ज़राकोशिशजोकरतामैंबहुतमशहूरहोजाता
  - Jalal Aarif
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