hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Shashank Shekhar Pathak
ho rahi thii jang uske naam par aur
ho rahi thii jang uske naam par aur | हो रही थी जंग उसके नाम पर और
- Shashank Shekhar Pathak
हो
रही
थी
जंग
उसके
नाम
पर
और
वो
ही
मेरे
दुश्मनों
के
काम
आया
- Shashank Shekhar Pathak
Download Sher Image
ज़ालिम
था
वो
और
ज़ुल्म
की
आदत
भी
बहुत
थी
मजबूर
थे
हम
उस
से
मोहब्बत
भी
बहुत
थी
Kaleem Aajiz
Send
Download Image
45 Likes
इस
गए
साल
बड़े
ज़ुल्म
हुए
हैं
मुझ
पर
ऐ
नए
साल
मसीहा
की
तरह
मिल
मुझ
से
Sarfraz Nawaz
Send
Download Image
27 Likes
न
छेड़
नाम-ओ-नसब
और
नस्ल-ओ-रंग
की
बात
कि
चल
निकलती
है
अक्सर
यहीं
से
जंग
की
बात
Zafar naseemi
Send
Download Image
30 Likes
वो
जंग
जिस
में
मुक़ाबिल
रहे
ज़मीर
मिरा
मुझे
वो
जीत
भी
'अंबर'
न
होगी
हार
से
कम
Ambreen Haseeb Ambar
Send
Download Image
25 Likes
जंग
में
जिन्हे
अब
तक
तुम
झुका
न
पाए
थे
झुक
रही
हैं
वो
सारी
पगड़ियाँ
मोहब्बत
में
Alankrat Srivastava
Send
Download Image
7 Likes
जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
Send
Download Image
4 Likes
जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
Send
Download Image
36 Likes
तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
Send
Download Image
22 Likes
टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
Send
Download Image
17 Likes
कभी
तो
ख़त्म
हो
ये
जंग
जिस
में
फ़क़त
मरने
को
जीना
पड़
रहा
है
Read Full
Anand Verma
Send
Download Image
21 Likes
Read More
ऐसे
बिछड़े
हैं
हम
दोनों
अब
के
मुश्किल
मिल
पाना
है
इक
काग़ज़
की
कश्ती
है
और
पार
दरिया
के
जाना
है
Shashank Shekhar Pathak
Send
Download Image
1 Like
अकेले
ही
तुम्हें
करना
पड़ेगा
तय
सफ़र
यारों
कहाँ
आता
यहाँ
है
काम
कोई
वक़्त
पर
यारों
Shashank Shekhar Pathak
Send
Download Image
4 Likes
सब
नहीं
करते
हैं
जो
मैं
बस
वही
करता
हूँ
घर
जला
के
मोहल्ले
में
रोशनी
करता
हूँ
तुम
क्या
छीनोगे
यार
मोहब्बत
मेरी
दुश्मनों
से
भी
मेरे
मैं
दिल
लगी
करता
हूँ
Read Full
Shashank Shekhar Pathak
Send
Download Image
3 Likes
जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
Send
Download Image
4 Likes
अगर
बे-वफ़ा
वो
सितमगर
न
होता
मोहब्बत
का
इल्ज़ाम
मुझ
पर
न
होता
हवा
मेरे
अपनों
ने
दी
थी
नहीं
तो
जलाया
किसी
ने
मिरा
घर
न
होता
नहीं
सीखता
उठ
खड़ा
होना
गिरकर
लगा
पाँव
में
गर
वो
पत्थर
न
होता
तुम्हें
नाज़
है
हुस्न
पर
तो
सुनो
तुम
मुझे
भी
जुदाई
का
अब
डर
न
होता
Read Full
Shashank Shekhar Pathak
Download Image
1 Like
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Allahabad Shayari
Manzil Shayari
Diwangi Shayari
Eitbaar Shayari
Aam Shayari