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Shashank Shekhar Pathak
akelaa hi tumhein karna padega tay safar yaaron
akelaa hi tumhein karna padega tay safar yaaron | अकेले ही तुम्हें करना पड़ेगा तय सफ़र यारों
- Shashank Shekhar Pathak
अकेले
ही
तुम्हें
करना
पड़ेगा
तय
सफ़र
यारों
कहाँ
आता
यहाँ
है
काम
कोई
वक़्त
पर
यारों
- Shashank Shekhar Pathak
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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उन
रस
भरी
आँखों
में
हया
खेल
रही
है
दो
ज़हर
के
प्यालों
में
क़ज़ा
खेल
रही
है
Akhtar Shirani
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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कि
हूँ
मसरूफ़
मैं
इतना
तुम्ही
को
याद
करने
में
तुम्ही
को
याद
करना
ही
मैं
अक्सर
भूल
जाता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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के
तुझे
कहाँ
मुझ
पर
ऐतबार
होता
था?
दर्द
होता
था
जब
तो
बेश़ुमार
होता
था
उस
दरख़्त
पर
अब
आते
नहीं
परिंदे
भी
जिसकी
छाँव
को
तेरा
इंतज़ार
होता
था
सूइयां
भी
चुभ
जातीं
उँगलियों
में
गर
तेरी
तीर
मेरे
भी
दिल
के
आर-पार
होता
था
क्या
बताऊँ
के
क्या
हासिल
हुआ
मोहब्बत
में?
बारिशों
को
कब
सहराओं
से
प्यार
होता
था?
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Shashank Shekhar Pathak
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साज़
ख़ामोश
कि
इक
टूटते
संगीत
के
नाम
प्यार
में
हमने
किए
गीत
समर्पन
कितने
तौबा
ये
तमकनत-ए-हुस्न
इलाही
तौबा
एक
श्रृंगार
को
तोड़े
गए
दर्पन
कितने
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Shashank Shekhar Pathak
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अधूरी
मुद्दतों
से
इक
कहानी
लिख
रहा
हूँ
मैं
फ़रेब,
इश्क़,आग
और
पानी
लिख
रहा
हूँ
मैं
कि
मिलने
आ
रहे
हैं
फिर
न
मिलने
की
जो
शर्त
पर
हाँ
नाम
उनके
ही
ये
ज़िंदगानी
लिख
रहा
हूँ
मैं
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Shashank Shekhar Pathak
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