main agar dil jala nahin hota | मैं अगर दिल जला नहीं होता

  - Jagjit Kafir
मैंअगरदिलजलानहींहोता
शे'रकोईकहानहींहोता
अज़्मत-ए-इश्क़हैकिझुकताहूँ
कोईपैकरख़ुदानहींहोता
बाँसकेशहरमेंबसेलोगों
हरशजरखोखलानहींहोता
बसवहीरातदिनकीगर्दिशहै
औरकुछभीनयानहींहोता
रासआनेलगीहैफ़ुर्क़तभी
इनदिनोंग़म-ज़दानहींहोता
अपनीवहशतसेख़ौफ़खाताहूँ
ज़ब्तहरमर्तबानहींहोता
एकसागरछुपाहैआँखोंमें
सिर्फ़आँसूछुपानहींहोता
मसअलाज़िंदगीकाहै'काफ़िर'
मौतमेंकुछबुरानहींहोता
  - Jagjit Kafir
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