ye zameen ye aasmaañ ye kahkashaan kuchh bhi nahin | ये ज़मीं ये आसमाँ ये कहकशाँ कुछ भी नहीं

  - Jagjit Kafir
येज़मींयेआसमाँयेकहकशाँकुछभीनहीं
सबफ़नाकीक़ैदमेंहैंजावेदाँकुछभीनहीं
हैमिरेहीदूर-उफ़्तादाकिसीगोशेमेंहैं
वुसअ'त-ए-कौनैनहूँमैंयेजहाँकुछभीनहीं
मैंबड़ीमुश्किलसेसमझाहूँक़ज़ाकेराज़को
बर्क़-ए-रक़्साँकेमुक़ाबिलआशियाँकुछभीनहीं
ज़िंदगीतख़रीबऔरता'मीरकाहीखेलहै
इल्मवालोंकोजहाँकीगुत्थियाँकुछभीनहीं
परिंदोंइनपरोंमेंज़र्फ़तोपैदाकरो
हसरत-ए-परवाज़कोयेबेड़ियाँकुछभीनहीं
ज़हरभीगरहिक्मतनलेंतोदवाबनजाएगा
इसजहाँमेंदेखिएतोराएगाँकुछभीनहीं
यारकीगलियोंमेंघुंघरूबाँधकरभीनाचलूँइश्क़में'काफ़िर'मिरीख़ुद्दारियाँकुछभीनहीं
  - Jagjit Kafir
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