ik but hai jise meri nazar Dhoondh rahi hai | इक बुत है जिसे मेरी नज़र ढूँढ़ रही है

  - Jagjit Kafir
इकबुतहैजिसेमेरीनज़रढूँढ़रहीहै
मुश्किलहैमुलाक़ातमगरढूँढ़रहीहै
लाखोंमेंकिसीएककेकाँधोंपेमिलेगा
वोसरकिजिसेअज़्मत-ए-सरढूँढ़रहीहै
मंज़िलनेमेरेपाँवकोचूमाहैकईबार
मैंवोहूँजिसेगर्द-ए-सफ़रढूँढ़रहीहै
इकबारकरोजंगमेंउसमाँकातसव्वुर
जोफ़ौतहुआलख़्त-ए-जिगरढूँढ़रहीहै
परवाज़कोबाक़ीहैंअभीऔरभीअंबर
हसरतमेरीअबज़र्फ़केपरढूँढ़रहीहै
इकरोज़उदासीनेमिरानामसुनाथा
उसदिनसेमुझेशाम-ओ-सहरढूँढ़रहीहै
ख़्वाहिशहैबड़ीदेरसे'काफ़िर'कीजबींको
सज्देकेलिएयारकादरढूँडरहीहै
  - Jagjit Kafir
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