deedaar tere husn ka bas aankh bhar karoon | दीदार तेरे हुस्न का बस आँख भर करूँँ

  - Jagjit Kafir
दीदारतेरेहुस्नकाबसआँखभरकरूँँ
औरफिरइसीसुरूरमेंपहरोंबसरकरूँँ
मिसरोंमेंढलकेआपकेदिलमेंउतरसकें
इतनामैंहरख़यालकोबारीक-तरकरूँँ
ज़िंदगीबतामुझेतूनेदियाहैक्या
तेरायक़ींकरूँँभीतोकिसबातपरकरूँँ
येभीतोइकतरहसेमोहब्बतकीहारहै
ख़ुदकोतुम्हारेहिज्रमेंबर्बादगरकरूँँ
मेरीमसाफ़तोंकीकोईइंतिहातोहो
इनआबलोंकेसाथमैंकबतकसफ़रकरूँँ
हरशख़्सकीज़बानपे'काफ़िर'कानामहो
इतनामैंअपनेआपकोअबनामवरकरूँँ
  - Jagjit Kafir
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