mirii zindagi hai saraab si kabhi maujzan kabhi tishna-dam | मिरी ज़िंदगी है सराब सी कभी मौजज़न कभी तिश्ना-दम

  - Jagdish Prakash
मिरीज़िंदगीहैसराबसीकभीमौजज़नकभीतिश्ना-दम
कभीइंतिज़ारकीधूपसीकभीक़ुर्बतोंकाकोईभरम
तिरीचाहतोंकायेसिलसिलाकिसीधूपछाँवकेखेलसा
कभीपूसमाघकीधूपसाकभीनग़्मा-ख़्वाँकभीचश्म-ए-नम
मुझेछूकेवक़्तगुज़रगयाज़रारुककेउम्रनिकलगई
जोरहातोपासयहीरहाकभीअपनादुखकभीसबकाग़म
कभीरास्तोंकेग़ुबारमेंकभीमंज़िलोंकेख़ुमारमें
कभीजुस्तुजू-ए-बहारमेंरहेहादसोंसेबंधेक़दम
तिरानामसुनकेचलीपवनतिराज़िक्रसुनकेखिलाचमन
किमिरीसवानेह-ए-ज़ीस्तपरतिरानामलिखकेरुकाक़लम
येज़राज़रासीशिकायतेंकहींबनजाएँहिकायतें
यहीपूछतेकिहुआहैक्याकभीहमसेतुमकभीतुमसेहम
कभीक़ुर्बतोंकासुकूँमिलाकभीफुर्क़तोंकाजुनूँमिला
कभीखोगएसभीरास्तेकभीमंज़िलोंसेमिलेक़दम
  - Jagdish Prakash
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