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J E Najm
pal do pal ki jo aashnaai thii
pal do pal ki jo aashnaai thii | पल दो पल की जो आशनाई थी
- J E Najm
पल
दो
पल
की
जो
आशनाई
थी
मुझ
को
लगता
था
कल
ख़ुदाई
थी
मैं
ने
ठुकरा
दिया
था
दुनिया
को
जब
यहाँ
तू
पलट
के
आई
थी
फिर
किसी
दूसरे
की
हो
जाना
ये
बता
मुझ
में
क्या
बुराई
थी
माँगते
क्यूँ
हो
तुम
दलील-ए-ख़ुदा
गर
ख़ुदा
था
तो
ये
ख़ुदाई
थी
रोग
भी
मुश्तरक
जदीद
सा
था
हर
तरफ़
एक
ही
दुहाई
थी
जिस
के
लब
पर
सवाल
आया
था
आग
उस
ने
ही
आ
लगाई
थी
'नज्म'
उस
मोड़
पर
चले
आए
जिस
जगह
साँस
डगमगाई
थी
- J E Najm
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किन
नींदों
अब
तू
सोती
है
ऐ
चश्म-ए-गिर्या-नाक
मिज़्गाँ
तो
खोल
शहर
को
सैलाब
ले
गया
Meer Taqi Meer
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जो
भी
होना
था
हो
गया
छोड़ो
अब
मैं
चलता
हूँ
रास्ता
छोड़ो
अब
तो
दुनिया
भी
देख
ली
तुमने
अब
तो
ख़्वाबों
को
देखना
छोड़ो
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Vikram Sharma
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किसी
ने
मुफ्त
में
वो
शख़्स
पाया
जो
हर
कीमत
पे
मुझको
चाहिए
था
Uzair Hijazi
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हर-चंद
ए'तिबार
में
धोके
भी
हैं
मगर
ये
तो
नहीं
किसी
पे
भरोसा
किया
न
जाए
Jaan Nisar Akhtar
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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करके
थोड़ी
हिम्मत
लिखना
चाहता
हूँ
नेताओं
को
लानत
लिखना
चाहता
हूँ
जिसको
पढ़कर
सारे
तुझ
सेे
प्यार
करें
तेरी
ऐसी
सीरत
लिखना
चाहता
हूँ
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Sanskar 'Sanam'
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किसे
फ़ुर्सत-ए-मह-ओ-साल
है
ये
सवाल
है
कोई
वक़्त
है
भी
कि
जाल
है
ये
सवाल
है
Abbas Qamar
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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दो
नन्हीं
कलियों
ने
रोक
लिया
वरना
तितली
ने
तो
आज
धतूरा
खाना
था
Shruti chhaya
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अगर
पलक
पे
है
मोती
तो
ये
नहीं
काफ़ी
हुनर
भी
चाहिए
अल्फ़ाज़
में
पिरोने
का
Javed Akhtar
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तेरे
जैसा
कमाल
कर
लेता
मैं
भी
रंजिश
बहाल
कर
लेता
रस्म-ए-उल्फ़त
का
पास
है
वर्ना
ग़ैर
ख़ुद
पे
हलाल
कर
लेता
तू
धड़कता
अगर
न
सीने
में
साँस
धड़कन
को
टाल
कर
लेता
अह्ल-ए-दुनिया
तो
अह्ल-ए-दुनिया
हैं
तू
तो
मेरा
ख़याल
कर
लेता
फूल
से
दोस्ती
निभानी
थी
कम
से
कम
आँख
लाल
कर
लेता
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J E Najm
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बाद
मुद्दत
के
हिज्र
सा
देना
मेरे
हाथों
में
आइना
देना
अच्छा
लगता
है
इस
ज़माने
को
बाद
मरने
के
बुत
बना
देना
जी
ये
तौहीन
है
चराग़ों
की
रात
बाक़ी
हो
और
बुझा
देना
कैनवस
पर
बहार
उतरेगी
आप
कुछ
तितलियाँ
बना
देना
मशवरा
है
कि
हम
जिए
जाएँ
कितना
आसाँ
है
मशवरा
देना
ज़िंदगी
'नज्म'
ख़्वाब
जैसी
है
लुत्फ़
आने
लगे
जगा
देना
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J E Najm
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एक
चेहरा
हदफ़
बनाने
पर
धर
लिया
क्यूँ
हमें
निशाने
पर
सोचता
हूँ
ये
क्या
तसलसुल
है
टूट
जाता
है
साँस
आने
पर
सारे
मोती
बिखरते
जाते
हैं
एक
धागे
के
टूट
जाने
पर
हिज्र
पीछे
ही
पड़
गया
मेरे
चंद
लम्हों
को
गुदगुदाने
पर
उँगलियाँ
'नज्म'
ख़ुद
पे
उठने
दे
तू
न
उँगली
उठा
ज़माने
पर
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J E Najm
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छोड़
ज़ंजीर
को
दुहाई
दे
ताकि
लोगों
को
भी
सुनाई
दे
कब
कहा
था
मुझे
ख़ुदाई
दे
मेरे
अंदर
से
तू
दिखाई
दे
खींच
सीने
से
तीर
धड़कन
का
खींच
ले
और
मुझे
रिहाई
दे
तेरी
जानिब
सुराग़
जाएगा
जान-ए-मन
इतनी
मत
सफ़ाई
दे
मैं
तिरी
आँख
में
उतर
पाऊँ
इस
क़दर
मुझ
को
भी
रसाई
दे
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J E Najm
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एक
चेहरे
पे
अड़
गया
हूँ
मैं
किस
मुसीबत
में
पड़
गया
हूँ
मैं
तू
समझ
हिज्र
मेरी
मर्ज़ी
है
तू
समझ
ख़ुद
बिछड़
गया
हूँ
मैं
जैसे
गुल-दाँ
ख़िज़ाँ
के
मौसम
में
देखो
कितना
उजड़
गया
हूँ
मैं
तेरी
इस्लाह
का
नतीजा
है
इस
क़दर
जो
बिगड़
गया
हूँ
मैं
नीलगूँ
झील
ये
बताती
है
तेरी
आँखों
को
लड़
गया
हूँ
मैं
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J E Najm
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