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J E Najm
tere jaisa kamaal kar leta
tere jaisa kamaal kar leta | तेरे जैसा कमाल कर लेता
- J E Najm
तेरे
जैसा
कमाल
कर
लेता
मैं
भी
रंजिश
बहाल
कर
लेता
रस्म-ए-उल्फ़त
का
पास
है
वर्ना
ग़ैर
ख़ुद
पे
हलाल
कर
लेता
तू
धड़कता
अगर
न
सीने
में
साँस
धड़कन
को
टाल
कर
लेता
अह्ल-ए-दुनिया
तो
अह्ल-ए-दुनिया
हैं
तू
तो
मेरा
ख़याल
कर
लेता
फूल
से
दोस्ती
निभानी
थी
कम
से
कम
आँख
लाल
कर
लेता
- J E Najm
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इतना
मसरूफ़
हूँ
जीने
की
हवस
में
'शाहिद'
साँस
लेने
की
भी
फ़ुर्सत
नहीं
होती
मुझ
को
Shahid Zaki
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हमारा
ख़ून
का
रिश्ता
है
सरहदों
का
नहीं
हमारे
ख़ून
में
गँगा
भी
चनाब
भी
है
Kanval Ziai
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इक
दिए
से
बँध
गई
है
मेरी
साँस
की
रिदम,
इक
लकीर
पर
टिकी
है
मेरी
ज़िंदगी
की
डोर
Aves Sayyad
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हद
से
ज़्यादा
भी
प्यार
मत
करना
जी
हर
इक
पे
निसार
मत
करना
क्या
ख़बर
किस
जगह
पे
रुक
जाए
साँस
का
एतिबार
मत
करना
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Qamar Ejaz
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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आप
अपने
से
हम-सुख़न
रहना
हमनशीं
साँस
फूल
जाती
है
Jaun Elia
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ये
फ़िल्मों
में
ही
सबको
प्यार
मिल
जाता
है
आख़िर
में
मगर
सचमुच
में
इस
दुनिया
में
ऐसा
कुछ
नहीं
होता
चलो
माना
कि
मेरा
दिल
मेरे
महबूब
का
घर
है
पर
उसके
पीछे
उसके
घर
में
क्या-क्या
कुछ
नहीं
होता
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Tehzeeb Hafi
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घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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सच
बताओ
कि
सच
यही
है
क्या
साँस
लेना
ही
ज़िंदगी
है
क्या
कुछ
नया
काम
कर
नई
लड़की
इश्क़
करना
है
बावली
है
क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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छोड़
ज़ंजीर
को
दुहाई
दे
ताकि
लोगों
को
भी
सुनाई
दे
कब
कहा
था
मुझे
ख़ुदाई
दे
मेरे
अंदर
से
तू
दिखाई
दे
खींच
सीने
से
तीर
धड़कन
का
खींच
ले
और
मुझे
रिहाई
दे
तेरी
जानिब
सुराग़
जाएगा
जान-ए-मन
इतनी
मत
सफ़ाई
दे
मैं
तिरी
आँख
में
उतर
पाऊँ
इस
क़दर
मुझ
को
भी
रसाई
दे
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J E Najm
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एक
चेहरा
हदफ़
बनाने
पर
धर
लिया
क्यूँ
हमें
निशाने
पर
सोचता
हूँ
ये
क्या
तसलसुल
है
टूट
जाता
है
साँस
आने
पर
सारे
मोती
बिखरते
जाते
हैं
एक
धागे
के
टूट
जाने
पर
हिज्र
पीछे
ही
पड़
गया
मेरे
चंद
लम्हों
को
गुदगुदाने
पर
उँगलियाँ
'नज्म'
ख़ुद
पे
उठने
दे
तू
न
उँगली
उठा
ज़माने
पर
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J E Najm
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एक
चेहरे
पे
अड़
गया
हूँ
मैं
किस
मुसीबत
में
पड़
गया
हूँ
मैं
तू
समझ
हिज्र
मेरी
मर्ज़ी
है
तू
समझ
ख़ुद
बिछड़
गया
हूँ
मैं
जैसे
गुल-दाँ
ख़िज़ाँ
के
मौसम
में
देखो
कितना
उजड़
गया
हूँ
मैं
तेरी
इस्लाह
का
नतीजा
है
इस
क़दर
जो
बिगड़
गया
हूँ
मैं
नीलगूँ
झील
ये
बताती
है
तेरी
आँखों
को
लड़
गया
हूँ
मैं
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J E Najm
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पल
दो
पल
की
जो
आशनाई
थी
मुझ
को
लगता
था
कल
ख़ुदाई
थी
मैं
ने
ठुकरा
दिया
था
दुनिया
को
जब
यहाँ
तू
पलट
के
आई
थी
फिर
किसी
दूसरे
की
हो
जाना
ये
बता
मुझ
में
क्या
बुराई
थी
माँगते
क्यूँ
हो
तुम
दलील-ए-ख़ुदा
गर
ख़ुदा
था
तो
ये
ख़ुदाई
थी
रोग
भी
मुश्तरक
जदीद
सा
था
हर
तरफ़
एक
ही
दुहाई
थी
जिस
के
लब
पर
सवाल
आया
था
आग
उस
ने
ही
आ
लगाई
थी
'नज्म'
उस
मोड़
पर
चले
आए
जिस
जगह
साँस
डगमगाई
थी
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बाद
मुद्दत
के
हिज्र
सा
देना
मेरे
हाथों
में
आइना
देना
अच्छा
लगता
है
इस
ज़माने
को
बाद
मरने
के
बुत
बना
देना
जी
ये
तौहीन
है
चराग़ों
की
रात
बाक़ी
हो
और
बुझा
देना
कैनवस
पर
बहार
उतरेगी
आप
कुछ
तितलियाँ
बना
देना
मशवरा
है
कि
हम
जिए
जाएँ
कितना
आसाँ
है
मशवरा
देना
ज़िंदगी
'नज्म'
ख़्वाब
जैसी
है
लुत्फ़
आने
लगे
जगा
देना
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