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J E Najm
chhod zanjeer ko duhaai de
chhod zanjeer ko duhaai de | छोड़ ज़ंजीर को दुहाई दे
- J E Najm
छोड़
ज़ंजीर
को
दुहाई
दे
ताकि
लोगों
को
भी
सुनाई
दे
कब
कहा
था
मुझे
ख़ुदाई
दे
मेरे
अंदर
से
तू
दिखाई
दे
खींच
सीने
से
तीर
धड़कन
का
खींच
ले
और
मुझे
रिहाई
दे
तेरी
जानिब
सुराग़
जाएगा
जान-ए-मन
इतनी
मत
सफ़ाई
दे
मैं
तिरी
आँख
में
उतर
पाऊँ
इस
क़दर
मुझ
को
भी
रसाई
दे
- J E Najm
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तिलिस्म-ए-यार
ये
पहलू
निकाल
लेता
है
कि
पत्थरों
से
भी
ख़ुशबू
निकाल
लेता
है
है
बे-लिहाज़
कुछ
ऐसा
की
आँख
लगते
ही
वो
सर
के
नीचे
से
बाजू
निकाल
लेता
है
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Tehzeeb Hafi
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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आँसू
हमारे
गिर
गए
उन
की
निगाह
से
इन
मोतियों
की
अब
कोई
क़ीमत
नहीं
रही
Jaleel Manikpuri
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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ये
भी
मुमकिन
है
मियाँ
आँख
भिगोने
लग
जाऊँ
वो
कहे
कैसे
हो
तुम
और
मैं
रोने
लग
जाऊँ
ऐ
मेरी
आँख
में
ठहराए
हुए
वस्ल
के
ख़्वाब
मैं
तवातुर
से
तेरे
साथ
न
सोने
लग
जाऊँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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मुँह
ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द
ओ
लब-ए-ख़ुश्क
ओ
चश्म-ए-तर
सच्ची
जो
दिल-लगी
है
तो
क्या
क्या
गवाह
है
Nazeer Akbarabadi
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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नज़र
आए
न
तू
जिनको
परेशानी
से
मरते
हैं
जो
तुझको
देख
लेते
हैं
वो
हैरानी
से
मरते
हैं
Varun Anand
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बाद
मुद्दत
के
हिज्र
सा
देना
मेरे
हाथों
में
आइना
देना
अच्छा
लगता
है
इस
ज़माने
को
बाद
मरने
के
बुत
बना
देना
जी
ये
तौहीन
है
चराग़ों
की
रात
बाक़ी
हो
और
बुझा
देना
कैनवस
पर
बहार
उतरेगी
आप
कुछ
तितलियाँ
बना
देना
मशवरा
है
कि
हम
जिए
जाएँ
कितना
आसाँ
है
मशवरा
देना
ज़िंदगी
'नज्म'
ख़्वाब
जैसी
है
लुत्फ़
आने
लगे
जगा
देना
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J E Najm
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एक
चेहरा
हदफ़
बनाने
पर
धर
लिया
क्यूँ
हमें
निशाने
पर
सोचता
हूँ
ये
क्या
तसलसुल
है
टूट
जाता
है
साँस
आने
पर
सारे
मोती
बिखरते
जाते
हैं
एक
धागे
के
टूट
जाने
पर
हिज्र
पीछे
ही
पड़
गया
मेरे
चंद
लम्हों
को
गुदगुदाने
पर
उँगलियाँ
'नज्म'
ख़ुद
पे
उठने
दे
तू
न
उँगली
उठा
ज़माने
पर
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J E Najm
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तेरे
जैसा
कमाल
कर
लेता
मैं
भी
रंजिश
बहाल
कर
लेता
रस्म-ए-उल्फ़त
का
पास
है
वर्ना
ग़ैर
ख़ुद
पे
हलाल
कर
लेता
तू
धड़कता
अगर
न
सीने
में
साँस
धड़कन
को
टाल
कर
लेता
अह्ल-ए-दुनिया
तो
अह्ल-ए-दुनिया
हैं
तू
तो
मेरा
ख़याल
कर
लेता
फूल
से
दोस्ती
निभानी
थी
कम
से
कम
आँख
लाल
कर
लेता
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J E Najm
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एक
चेहरे
पे
अड़
गया
हूँ
मैं
किस
मुसीबत
में
पड़
गया
हूँ
मैं
तू
समझ
हिज्र
मेरी
मर्ज़ी
है
तू
समझ
ख़ुद
बिछड़
गया
हूँ
मैं
जैसे
गुल-दाँ
ख़िज़ाँ
के
मौसम
में
देखो
कितना
उजड़
गया
हूँ
मैं
तेरी
इस्लाह
का
नतीजा
है
इस
क़दर
जो
बिगड़
गया
हूँ
मैं
नीलगूँ
झील
ये
बताती
है
तेरी
आँखों
को
लड़
गया
हूँ
मैं
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J E Najm
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पल
दो
पल
की
जो
आशनाई
थी
मुझ
को
लगता
था
कल
ख़ुदाई
थी
मैं
ने
ठुकरा
दिया
था
दुनिया
को
जब
यहाँ
तू
पलट
के
आई
थी
फिर
किसी
दूसरे
की
हो
जाना
ये
बता
मुझ
में
क्या
बुराई
थी
माँगते
क्यूँ
हो
तुम
दलील-ए-ख़ुदा
गर
ख़ुदा
था
तो
ये
ख़ुदाई
थी
रोग
भी
मुश्तरक
जदीद
सा
था
हर
तरफ़
एक
ही
दुहाई
थी
जिस
के
लब
पर
सवाल
आया
था
आग
उस
ने
ही
आ
लगाई
थी
'नज्म'
उस
मोड़
पर
चले
आए
जिस
जगह
साँस
डगमगाई
थी
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J E Najm
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