saare aangan bhi chup ho rahe hain | सारे आँगन भी चुप हो रहे हैं

  - Hrishita Singh
सारेआँगनभीचुपहोरहेहैं
अबतोजंगलभीसबरोरहेहैं
रूहतोकबकीहीमरचुकीहै
अबतोहमबसबदनढोरहेहैं
सबदरख़्तोंकोयेकाटदेते
फूलगमलोंमेंफिरबोरहेहैं
रहतेकबतकउसीवस्लमेंहम
हिज्रकीहमवजहहोरहेहैं
अबनहींनींदपूरीमुनासिब
आधीहीनींदबससोरहेहैं
सबकीकरतेथेहमहीहिफ़ाज़त
अबयहाँख़ुदहीकोखोरहेहैं
ख़ाकहीतोयहाँहोतेहैंसब
सबसिकंदरयहाँजोरहेहैं
येजोआलममुनासिबनहींथा
हमभीइसकीतरहहोरहेहैं
  - Hrishita Singh
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