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Hrishita Singh
kaun rehta KHafaa itni si baat par
kaun rehta KHafaa itni si baat par | कौन रहता ख़फ़ा इतनी सी बात पर
- Hrishita Singh
कौन
रहता
ख़फ़ा
इतनी
सी
बात
पर
जीना
ही
कर
दिया
बार
इसी
बात
पर
मैं
ख़फ़ा
हूँ
अभी
उस
सेे
जिस
बात
पर
वो
भी
मुझ
सेे
ख़फ़ा
है
उसी
बात
पर
चाहती
हूँ
के
अब
मसअला
हल
हो,
वो
चाहता
है
लड़ाई
किसी
बात
पर
रंजिशें
मैं
मिटाती
रही
ज़ेहन
से
ताने
वो
दे
रहा
है
इसी
बात
पर
कहना
अबकी
लगाएगा
मुझको
गले
मुस्कुरा
वो
रहा
था
इसी
बात
पर
- Hrishita Singh
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देखो
मौत
का
मौसम
आने
वाला
है
ज़िंदा
रहना
सब
सेे
बड़ी
लड़ाई
है
Shadab Asghar
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सूरज
से
जंग
जीतने
निकले
थे
बेवक़ूफ़
सारे
सिपाही
मोम
के
थे
घुल
के
आ
गए
Rahat Indori
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सच्चाई
को
अपनाना
आसान
नहीं
दुनिया
भर
से
झगड़ा
करना
पड़ता
है
Nawaz Deobandi
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आख़िरी
जंग
मैं
लड़ने
के
लिए
निकला
हूँ
फिर
रहे
या
न
रहे
तेरा
दिवाना
आना
Mubarak Siddiqi
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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जंग
तो
ख़ुद
ही
एक
मसअला
है
जंग
क्या
मसअलों
का
हल
देगी
Sahir Ludhianvi
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इश्क़
भी
अपनी
ही
शर्तों
पे
किया
है
मैं
ने
ख़ुद
को
बेचा
नहीं
बाज़ार
में
सस्ता
करके
उस
से
कहना
था
के
वो
कितना
ज़रूरी
है
मुझे
आ
रहा
हूँ
अभी
जिस
शख़्स
से
झगड़ा
करके
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Khan Janbaz
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देश
मेरा
जंग
तो
जीता
मगर
लौट
कर
आया
नहीं
बेटा
मेरा
Divy Kamaldhwaj
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कल
रात
बहुत
ग़ौर
किया
है
सो
हम
उसकी
तय
करके
उठे
हैं
कि
तमन्ना
ना
करेंगे
इस
बार
वो
तल्ख़ी
है
की
रूठे
भी
नहीं
हम
अबके
वो
लड़ाई
है
के
झगड़ा
ना
करेंगे
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Jaun Elia
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जंग
अपनों
के
बीच
जारी
है
सबके
हाथों
में
इक
कटारी
है
छत
हो
दीवार
हो
कि
दरवाज़ा
सबकी
अपनी
ही
ज़िम्मेदारी
है
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Santosh S Singh
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बुतों
की
इसी
दुनिया
में
अब
हम
उनको
ख़ुदा
कर
रहे
हैं
Hrishita Singh
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सच
जान
ले
न
उनका
कोई
ऐसे
सब
लोग
मुँह
छुपाए
फिर
रहे
हैं
Hrishita Singh
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मेरी
क़िस्मत
में
तो
बस
इक
ही
दरवाज़ा
है
और
वो
भी
बस
तेरे
आने
से
ही
खुलता
है
Hrishita Singh
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वो
फ़ुर्क़त
अदा
कर
रहे
हैं
हम
अब
भी
वफा
कर
रहे
हैं
Hrishita Singh
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अपनी
ज़िद
में
हारे
हैं
तुमने
अपने
सब
सेे
ज़्यादा
प्यारे
लोग
Hrishita Singh
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