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Hrishita Singh
dekh kar tum bhi zakham mere ho hanste
dekh kar tum bhi zakham mere ho hanste | देख कर तुम भी ज़ख़्म मेरे हो हँसते
- Hrishita Singh
देख
कर
तुम
भी
ज़ख़्म
मेरे
हो
हँसते
तुम
सेे
हमदर्दी
की
भी
हसरत
नहीं
है
- Hrishita Singh
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ये
उसकी
मोहब्बत
है
कि
रुकता
है
तेरे
पास
वरना
तेरी
दौलत
के
सिवा
क्या
है
तेरे
पास
Zia Mazkoor
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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दिल-लगी
में
हसरत-ए-दिल
कुछ
निकल
जाती
तो
है
बोसे
ले
लेते
हैं
हम
दो-चार
हँसते
बोलते
Munshi Amirullah Tasleem
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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हमें
दीदार
से
मरहूम
रखकर
है
नज़र
दिल
पर
पराया
माल
ताको
और
दौलत
अपनी
रहने
दो
Dagh Dehlvi
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गाहे
गाहे
की
मुलाक़ात
ही
अच्छी
है
'अमीर'
क़द्र
खो
देता
है
हर
रोज़
का
आना
जाना
Ameer Minai
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इक
नई
क़िस्म
तलाशी
गई
है
फूलों
की
मेरी
हसरत
है
उसे
नाम
तुम्हारा
मिल
जाए
Vishnu virat
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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उसे
तो
दौलत-ए-दुनिया
भी
कम
भी
पाने
को
मिरी
तो
ज़ात
का
मीज़ान
भी
ज़ियादा
नहीं
Vipul Kumar
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याँ
दानाई
के
सब
दरवाज़े
भी
खुलते
हैं
याँ
सबको
इक
जैसा
ही
नश्शा
भी
होता
है
Hrishita Singh
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वो
तो
किसी
को
भी
अपना
ख़ास
नहीं
रखता
प्यारा
भी
हो
कोई
तो
वो
पास
नहीं
रखता
Hrishita Singh
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दुनिया
के
ग़म
फिर
उसी
को
सौंप
कर
के
मैं
भी
आख़िर
हँस
ही
दूँगी
खिलखिला
कर
Hrishita Singh
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मैं
बंदा
भी
तो
उसका
ही
हूँ
यहाँ
पर
तो
फिर
मैं
ही
उस
सेे
डरा
रहता
कब
तक
Hrishita Singh
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आधी
नींद
के
मारे
लोग
कैसे
हैं
ये
बेचारे
लोग
Hrishita Singh
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