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Hrishita Singh
vo mujhe kitna hi jaanta hai
vo mujhe kitna hi jaanta hai | वो मुझे कितना ही जानता है
- Hrishita Singh
वो
मुझे
कितना
ही
जानता
है
वो
तो
लोगों
की
बस
मानता
है
उस
के
ही
ख़्वाब
तो
देखती
हूँ
पर
मुझे
दोस्त
वो
मानता
है
- Hrishita Singh
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कब
लौटा
है
बहता
पानी
बिछड़ा
साजन
रूठा
दोस्त
हम
ने
उस
को
अपना
जाना
जब
तक
हाथ
में
दामाँ
था
Ibn E Insha
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कोई
दिक़्क़त
नहीं
है
गर
तुम्हें
उलझा
सा
लगता
हूँ
मैं
पहली
मर्तबा
मिलने
में
सबको
ऐसा
लगता
हूँ
ज़रूरी
तो
नहीं
हम
साथ
हैं
तो
कोई
चक्कर
हो
वो
मेरी
दोस्त
है
और
मैं
उसे
बस
अच्छा
लगता
हूँ
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Ali Zaryoun
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मुझको
ये
मालूम
नहीं
था
तुम
सेे
मिलने
से
पहले
दोस्त
जल्दी
आँखें
भरने
वालों
के
मन
जल्दी
भर
जाते
हैं
Vikas Rana
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कौन
रोता
है
किसी
और
की
ख़ातिर
ऐ
दोस्त
सब
को
अपनी
ही
किसी
बात
पे
रोना
आया
Sahir Ludhianvi
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क़फस
उदास
है
यारों
सबास
कुछ
तो
कहो
कहीं
तो
बहरे-खुदा
आज
ज़िक्र-ए-यार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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बादलों
में
से
छनता
हुआ
नूर
देख
ऐसी
रौशन
जबीं
है
मेरे
यार
की
Afzal Ali Afzal
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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दाग़
दुनिया
ने
दिए
ज़ख़्म
ज़माने
से
मिले
हम
को
तोहफ़े
ये
तुम्हें
दोस्त
बनाने
से
मिले
Kaif Bhopali
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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इक
तो
उसकी
ऐसी
मतवाली
आँखें
तौबा
उस
पर
वो
बातें
भी
तो
ऐसी
ही
करता
है
Hrishita Singh
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सच
जान
ले
न
उनका
कोई
ऐसे
सब
लोग
मुँह
छुपाए
फिर
रहे
हैं
Hrishita Singh
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ये
उलझनें
मुझे
ही
खा
रही
हैं
अब
ख़ुद
को
ही
सताए
फिर
रहे
हैं
Hrishita Singh
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यूँँ
तो
रहते
हैं
ख़ुद
से
बे-ख़बर
भी
है
अपने
पास
पर
ज़ौक़-ए-नज़र
भी
Hrishita Singh
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तुम
न
आए
फ़ज़ा
भी
ये
रूखी
सी
थी
तुम
जो
आओ
तो
गीतों
को
भी
सुर
मिले
जब
निहारा
था
तुमने
तो
सँवरी
थी
मैं
फेरी
जब
से
नज़र
तो
उजड़ने
लगे
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Hrishita Singh
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