kab ka guzar chuka hai vo mausam shabaab ka | कब का गुज़र चुका है वो मौसम शबाब का

  - Hafeez Shahid
कबकागुज़रचुकाहैवोमौसमशबाबका
अबज़िक्रहैफ़ुज़ूलवफ़ाकीकिताबका
फ़ुर्सतमिलेतोदेखज़रादिलकाआइना
इसमेंहैअक्सतेरेगुनाह-ओ-सवाबका
चुप-चापहाल-ए-अहल-ए-नज़रदेखतेरहो
हैकिसकेपासवक़्तसवाल-ओ-जवाबका
हरशख़्सघिरगयाहैनएइज़्तिराबमें
तोड़ाहैजिसनेक़ुफ़्लदर-ए-इज़्तिराबका
रखताहैतेरेरू-ए-हसींसेमुशाबहत
हरशाख़परसजाहैजोचेहरागुलाबका
काफ़ीहैउसकीज़ातकेइरफ़ानकेलिए
मौज-ए-हवाकेदोशपेउड़नासहाबका
'शाहिद'जिन्हेंख़बरहैरुमूज़-ए-हयातकी
रखतेनहींहिसाबग़म-ए-बे-हिसाबका
  - Hafeez Shahid
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