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Ada Jafarey
hamaare shahar ke logon ka ab ahvaal itnaa hai
hamaare shahar ke logon ka ab ahvaal itnaa hai | हमारे शहर के लोगों का अब अहवाल इतना है
- Ada Jafarey
हमारे
शहर
के
लोगों
का
अब
अहवाल
इतना
है
कभी
अख़बार
पढ़
लेना
कभी
अख़बार
हो
जाना
- Ada Jafarey
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किस
ने
हमारे
शहर
पे
मारी
है
रौशनी
हर
इक
मकाँ
के
ज़ख़्म
से
जारी
है
रौशनी
Nomaan Shauque
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ऐ
शहर-ए-जान-ए-जाँ
ऐ
शहर-ए-हमदम
अगर
ज़िन्दा
रहे
फिर
आएँगे
हम
Shajar Abbas
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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एक
दरवेश
को
तिरी
ख़ातिर
सारी
बस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
Ammar Iqbal
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चैन
की
बाँसुरी
बजाइये
आप
शहर
जलता
है
और
गाइये
आप
हैं
तटस्थ
या
कि
आप
नीरो
हैं
असली
सूरत
ज़रा
दिखाइये
आप
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Gorakh Pandey
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आँख
वो
इक
शहर
जिस
में
दम
घुटेगा
दिल
में
रहना
घर
में
रहने
की
तरह
है
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Neeraj Neer
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घर
पहुँचता
है
कोई
और
हमारे
जैसा
हम
तेरे
शहरस
जाते
हुए
मर
जाते
हैं
Abbas Tabish
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नक़्शा
उठा
के
और
कोई
शहर
देखिए
इस
शहर
में
तो
सब
से
मुलाक़ात
हो
गई
Nida Fazli
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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मैं
आँधियों
के
पास
तलाश-ए-सबा
में
हूँ
तुम
मुझ
से
पूछते
हो
मिरा
हौसला
है
क्या
Ada Jafarey
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चाक-ए-दिल
भी
कभी
सिलते
होंगे
लोग
बिछड़े
हुए
मिलते
होंगे
रोज़-ओ-शब
के
उन्हीं
वीरानों
में
ख़्वाब
के
फूल
तो
खिलते
होंगे
नाज़-परवर
वो
तबस्सुम
से
कहीं
सिलसिले
दर्द
के
मिलते
होंगे
हम
भी
ख़ुशबू
हैं
सबास
कहियो
हम-नफ़स
रोज़
न
मिलते
होंगे
सुब्ह
ज़िंदाँ
में
भी
होती
होगी
फूल
मक़्तल
में
भी
खिलते
होंगे
अजनबी
शहर
की
गलियों
में
'अदा'
दिल
कहाँ
लोग
ही
मिलते
होंगे
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Ada Jafarey
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एक
आईना
रू-ब-रू
है
अभी
उस
की
ख़ुश्बू
से
गुफ़्तुगू
है
अभी
वही
ख़ाना-ब-दोश
उम्मीदें
वही
बे-सब्र
दिल
की
ख़ू
है
अभी
दिल
के
गुंजान
रास्तों
पे
कहीं
तेरी
आवाज़
और
तू
है
अभी
ज़िंदगी
की
तरह
ख़िराज-तलब
कोई
दरमाँदा
आरज़ू
है
अभी
बोलते
हैं
दिलों
के
सन्नाटे
शोर
सा
ये
जो
चार-सू
है
अभी
ज़र्द
पत्तों
को
ले
गई
है
हवा
शाख़
में
शिद्दत-ए-नुमू
है
अभी
वर्ना
इंसान
मर
गया
होता
कोई
बे-नाम
जुस्तुजू
है
अभी
हम-सफ़र
भी
हैं
रहगुज़र
भी
है
ये
मुसाफ़िर
ही
कू-ब-कू
है
अभी
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Ada Jafarey
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जो
चराग़
सारे
बुझा
चुके
उन्हें
इंतिज़ार
कहाँ
रहा
ये
सुकूँ
का
दौर-ए-शदीद
है
कोई
बे-क़रार
कहाँ
रहा
Ada Jafarey
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एक
आईना
रू-ब-रू
है
अभी
उस
की
ख़ुश्बू
से
गुफ़्तुगू
है
अभी
Ada Jafarey
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