padh raha hooñ nisaab ho jaiseus ka chehra kitaab ho jaise | पढ़ रहा हूँ निसाब हो जैसे

  - Hafeez Shahid
पढ़रहाहूँनिसाबहोजैसे
उसकाचेहराकिताबहोजैसे
यूँँबसरकररहाहूँदुनियामें
ज़िंदगानीअज़ाबहोजैसे
शाख़-ए-क़ामतपेवोहसींचेहरा
एकताज़ागुलाबहोजैसे
यूँँवोरहताहैमेरीआँखोंमें
मेरीआँखोंकाख़्वाबहोजैसे
वोमिरेबख़्तकेख़ज़ीनेमें
गौहर-ए-ला-जवाबहोजैसे
उसकीहस्तीकिताब-ए-हस्तीका
इकहसींइंतिसाबहोजैसे
ज़हर-आलामदिलकेसाग़रमें
इकपुरानीशराबहोजैसे
झूटअबबोलतेहैंलोगऐसे
येभीकार-ए-सवाबहोजैसे
रेग-ए-दश्त-ए-ख़यालमें'शाहिद'
यादउसकीसराबहोजैसे
  - Hafeez Shahid
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