fikr-e-sood-o-ziyaan men rehta hooñ | फ़िक्र-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ में रहता हूँ

  - Hafeez Shahid
फ़िक्र-ए-सूद-ओ-ज़ियाँमेंरहताहूँ
मैंभीइसख़ाक-दाँमेंरहताहूँ
नीलगूँआसमानकेनीचे
ख़ेमा-ए-जिस्म-ओ-जाँमेंरहताहूँ
मैंहूँआज़ादकबज़मानेमें
क़ैद-ए-वहम-ओ-गुमाँमेंरहताहूँ
मैंमोहब्बतकीरौशनीबनकर
वक़्तकीकहकशाँमेंरहताहूँ
मैंबहारोंकेरंगमेंढलकर
मंज़र-ए-बोस्ताँमेंरहताहूँ
जानेक्याबातहैकिमैंतन्हा
महफ़िल-ए-दोस्ताँमेंरहताहूँ
अपनेबूढेवजूदकेअंदर
इकशिकस्तामकाँमेंरहताहूँ
फ़िक्र-ए-इतलाफ़-ए-ज़िंदगीकैसा
मैंअजलकीअमाँमेंरहताहूँ
मैंबगूलोंकेदरमियाँ'शाहिद'
दश्त-ए-अस्र-ए-रवाँमेंरहताहूँ
  - Hafeez Shahid
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