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Rajesh Reddy
jitni batni thii bat chuki ye zameen
jitni batni thii bat chuki ye zameen | जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं
- Rajesh Reddy
जितनी
बटनी
थी
बट
चुकी
ये
ज़मीं
अब
तो
बस
आसमान
बाक़ी
है
- Rajesh Reddy
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चाँद
को
देखकर
ये
लगता
है
तुम
मेरी
जान
आसमान
में
हो
Shajar Abbas
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तू
शाहीं
है
परवाज़
है
काम
तेरा
तेरे
सामने
आसमाँ
और
भी
हैं
Allama Iqbal
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राहों
में
जान
घर
में
चराग़ों
से
शान
है
दीपावली
से
आज
ज़मीन
आसमान
है
Obaid Azam Azmi
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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मेरे
हुजरे
में
नहीं
और
कहीं
पर
रख
दो
आसमाँ
लाए
हो
ले
आओ
ज़मीं
पर
रख
दो
Rahat Indori
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हम
आसमाँ
के
लोग
थे
जन्नत
से
आए
थे
ख़ुद
को
मगर
ज़मीं
में
बोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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मेरी
हर
गुफ़्तगू
ज़मीं
से
रही
यूँँ
तो
फ़ुर्सत
में
आसमान
भी
था
Madan Mohan Danish
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लब
पे
आता
था
जो
दु'आ
बन
कर
दिल
में
रहता
है
अब
ख़ला
बन
कर
कितना
इतरा
रहा
है
अब
वो
फूल
तेरे
बालों
का
मोगरा
बन
कर
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Haider Khan
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हम
वो
हैं
जो
नइँ
डरते
वक़्त
के
इम्तिहान
से
वो
परिंदे
और
थे
जो
डर
गए
आसमान
से
Madhav
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उस
के
चेहरे
की
चमक
के
सामने
सादा
लगा
आसमाँ
पे
चाँद
पूरा
था
मगर
आधा
लगा
Iftikhar Naseem
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मरके
भी
जीने
का
अरमान
कहाँ
जाता
है
जाके
भी
दुनिया
से
इंसान
कहाँ
जाता
है
देखना
है
कि
जो
उठता
है
परेशाँ
दिल
से
वो
धुआँ
होके
परेशान
कहाँ
जाता
है
ये
सुना
है
कि
नज़र
रखती
है
दुनिया
मुझ
पर
मेरा
दुनिया
की
तरफ़
ध्यान
कहाँ
जाता
है
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Rajesh Reddy
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आख़िर
तो
डूबना
ही
था
काग़ज़
की
नाव
को
इल्ज़ाम
देते
रहिए
नदी
के
बहाव
को
दिल
के
धुऐं
को
आँखों
में
आने
नहीं
दिया
आसाँ
नहीं
था
साधना
इस
रख-रखाव
को
बन
आई
जाँ
पे
जब
पड़ा
सामान
बाँधना
मंज़िल
समझ
के
बैठ
गए
थे
पड़ाव
को
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Rajesh Reddy
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दोस्तों
का
क्या
है
वो
तो
यूँँ
भी
मिल
जाते
हैं
मुफ़्त
रोज़
इक
सच
बोल
कर
दुश्मन
कमाने
चाहिएँ
Rajesh Reddy
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शाम
को
जिस
वक़्त
ख़ाली
हाथ
घर
जाता
हूँ
मैं
मुस्कुरा
देते
हैं
बच्चे
और
मर
जाता
हूँ
मैं
Rajesh Reddy
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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