ik qabeele se hain lekin rang-o-naqsha aur hai | इक क़बीले से हैं लेकिन रंग-ओ-नक़्शा और है

  - Hafeez Shahid
इकक़बीलेसेहैंलेकिनरंग-ओ-नक़्शाऔरहै
औरहैकाँटोंकीदुनियागुलकीदुनियाऔरहै
इश्तिराक-ए-फ़िक्रहोकैसेहमारेदरमियाँ
तेरीख़्वाहिशऔरहैमेरीतमन्नाऔरहै
औरहीमंज़रहैदुनियाकासर-ए-तूर-ए-नज़र
चश्म-ए-दिलकेसामनेलेकिनतमाशाऔरहै
आरज़ूकेबहर-ओ-दरियाकीकहानीक्याकहूँ
इसकासाहिलऔरहैइसकाकिनाराऔरहै
देखनातूफ़ानमेंघिरकररहजाएकहीं
नाख़ुदायेआरज़ुओंकासफ़ीनाऔरहै
अबबदलनाहीपड़ेगायेतरीक़-ए-ज़िंदगी
अबमिरीजाँसूरत-ए-हालात-ए-दुनियाऔरहै
दुश्मनोंकाहाथइसमेंहैयारोंकाक़ुसूर
इन्क़िता-ए-दोस्तीकाशाख़सानाऔरहै
ज़िंदगीकेमोड़पर'शाहिद'मिलेंफिरकिसतरह
उसकारस्तामुख़्तलिफ़हैमेरारस्ताऔरहै
  - Hafeez Shahid
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