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Satya Prakash Soni
chitthi likhne men ik muddat lagti hai
chitthi likhne men ik muddat lagti hai | चिट्ठी लिखने में इक मुद्दत लगती है
- Satya Prakash Soni
चिट्ठी
लिखने
में
इक
मुद्दत
लगती
है
पढ़ने
वाला
मिनटों
में
पढ़
लेता
है
- Satya Prakash Soni
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प्यार
का
पहला
ख़त
लिखने
में
वक़्त
तो
लगता
है
नए
परिंदों
को
उड़ने
में
वक़्त
तो
लगता
है
Hastimal Hasti
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वो
तड़प
जाए
इशारा
कोई
ऐसा
देना
उस
को
ख़त
लिखना
तो
मेरा
भी
हवाला
देना
Azhar Inayati
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तेरे
वादों
को
फिर
से
पढ़
रहा
हूँ
तेरे
ख़त
पानी
पानी
हो
रहे
हैं
Harman Dinesh
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तेरे
ख़त
आज
लतीफ़ों
की
तरह
लगते
हैं
ख़ूब
हँसता
हूँ
जहाँ
लफ़्ज-ए-वफ़ा
आता
है
Zubair Ali Tabish
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हाकिम
को
इक
चिट्ठी
लिक्खो
सब
के
सब
और
उस
में
बस
इतना
लिखना
लानत
है
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Varun Anand
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तुम्हारा
दिल
है
बड़ा
सा
दरबा
जहाँँ
कबूतर
फड़क
रहे
हैं
कहाँँ
है
खोई
हमारी
चिट्ठी
कहाँँ
कबूतर
भटक
रहा
है
Anmol Mishra
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ऐसा
न
हो
कि
प्यार
का
मज़मून
भाँप
कर
ख़त
खोलिए
तो
उस
में
उदासी
के
अक्स
हों
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Gaurav Singh
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जब
प्यार
नहीं
है
तो
भुला
क्यूँँ
नहीं
देते
ख़त
किस
लिए
रक्खे
हैं
जला
क्यूँँ
नहीं
देते
Hasrat Jaipuri
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शराफ़त
ने
मुझको
कहीं
का
न
छोड़ा
रक़ीब
अपने
ख़त
मुझ
सेे
लिखवा
रहे
हैं
Rajesh Reddy
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जिस
दिन
तुम्हारे
ख़त
का
मुझे
इंतिज़ार
था
उस
दिन
तमाम
पंछी
कबूतर
लगे
मुझे
Ali Rumi
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ख़ुदा
की
मुझ
पे
ये
रहमत
रही
माँ
तेरे
पल्लू
की
सर
पे
छत
रही
माँ
यहाँ
परदेस
में
आराम
है
पर
ज़रा
सी
नींद
में
दहशत
रही
माँ
मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
तेरे
आँचल
के
कोने
में
बँधी
उस
अठन्नी
की
बड़ी
क़ीमत
रही
माँ
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Satya Prakash Soni
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मुनासिब
सी
अगर
क़ीमत
मिलेगी
बिकाऊ
हाट
में
ग़ैरत
मिलेगी
हवादिस
ढालता
हूँ
शा'इरी
में
मेरे
अश'आर
में
नुदरत
मिलेगी
मेरा
दम
घुट
रहा
है
आज
बेहद
ग़ज़ल
हो
जाए
तो
राहत
मिलेगी
मैं
दुनिया
भर
से
लड़
लूंगा
मगर
तुम
खड़े
रहना
मुझे
हिम्मत
मिलेगी
नज़र
इक
बाम
पर
अटकी
हुई
है
कभी
तो
चाँद
को
फ़ुर्सत
मिलेगी
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Satya Prakash Soni
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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सुखाई
जा
रही
है
जुल्फ़
धोकर
घटा
या'नी
निचोड़ी
जा
रही
है
Satya Prakash Soni
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छत
पे
सिगरेट
ले
के
बैठा
है
चाँद
भी
बेक़रार
है
शायद
Satya Prakash Soni
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