munaasib si agar qeemat milegi | मुनासिब सी अगर क़ीमत‌ मिलेगी

  - Satya Prakash Soni
मुनासिबसीअगरक़ीमत‌मिलेगी
बिकाऊहाट‌मेंग़ैरतमिलेगी
हवादिसढालताहूँशा'इरीमें
मेरेअश'आरमेंनुदरतमिलेगी
मेरादमघुटरहाहैआजबेहद
ग़ज़लहोजाएतोराहतमिलेगी
मैंदुनियाभरसेलड़लूंगामगरतुम
खड़ेरहनामुझेहिम्मत‌मिलेगी
नज़रइकबामपरअटकीहुईहै
कभीतोचाँदकोफ़ुर्सतमिलेगी
  - Satya Prakash Soni
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