zaraa apni aañkhen to dena | ज़रा अपनी आँखें तो देना

  - Ghalib Ahmad
ज़राअपनीआँखेंतोदेना
किदेखूँतुम्हारीनज़रसे
जहान-ए-तमन्ना
जहाँलोगकहतेहैं
नर्गिसनेइकफूलफिरसेजनाहै
हज़ारोंबरसकीसज़ाझेलकर
गुमाँऔरअफ़्शाँकेरंगोंमेंफिरसे
बहारोंकीख़ुशबूसफ़रकररहीहै
किलम्होंकीलहरोंपेहरसू
नईआरज़ूपुर-फ़िशाँहै
तमन्नाकीतन्हाइयाँमुंतज़िरहैं
किशायदवहीवक़्तकाक़ाफ़िला
फिरमिले
जोउनकोसुलाकरबताएबिनाचलदियाथा
शुक्रिया
अपनीआँखेंतोलो
हमेंअपनीबे-नूरीअच्छी
हमेंक्यामिला
हज़ारोंबरसकासफ़र
औरफिर
दीदा-वर
ख़ुद-नज़रख़ुद-गिरफ़्ता
येपानीकेतख़्तेपेलटकाहुआफूल
गुमाँऔरअफ़्शाँकेरंगोंकीहिजरतका
ताज़ानिशाँ
देगयादाग़-ए-हिजरतकीइकदुखभरीदास्ताँ
येचश्म-ए-तमन्ना
ख़ुदायाख़ुदीथीकिथीख़ुद-नुमाई
येफूलोंकीदुनियाभी
अंधेरनगरीहै
अंधोंकीदुनियाहै
बे-नूर-ओ-बे-ख़ौफ़
इंसाफ़अंधाहै
फूलोंकोफाँसीकेफँदे
  - Ghalib Ahmad
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