kya kare haal-e-dil bayaañ koina raha zeb-e-daastaan koi | क्या करे हाल-ए-दिल बयाँ कोई

  - Ghalib Ahmad
क्याकरेहाल-ए-दिलबयाँकोई
रहाज़ेब-ए-दास्ताँकोई
फिरहैक़ल्ब-ओ-नज़रमेंयकसूई
काशजाएना-गहाँकोई
आँखशबनमकीदेखतीहैकिसे
चाँदनीमेंहुआजवाँकोई
शहरसदूरदिनकाफूलखिला
दश्तमेंभीहैगुलिस्ताँकोई
दिलभीहमराज़-ए-आरज़ूनिकला
अबनहींअपनाराज़-दाँकोई
छोड़दुख-सुखकीमंज़िलोंकातवाफ़
दिलमियाँढूँडआस्ताँकोई
दूरअपनोंसेहोरहेहैंलोग
देखिएकबमिलेकहाँकोई
  - Ghalib Ahmad
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