dekha nahin vo aadmi tanhaa kahooñ jise | देखा नहीं वो आदमी तन्हा कहूँ जिसे

  - Ghalib Ahmad
देखानहींवोआदमीतन्हाकहूँजिसे
वोआजतकमिलानहींअपनाकहूँजिसे
सदियोंसेइंतिज़ारहैउसएकशख़्सका
आएहोकितनीदेरसेइतनाकहूँजिसे
नज़रेंतरसकेरहगईंता-अक्स-ए-आबशार
देखानहींहैपानीकाक़तराकहूँजिसे
कौन-ओ-मकाँमेंमौजज़नहैतेरीआगही
इकलम्हाभीमिलानहींतेराकहूँजिसे
दरियाहूँमौजबनकेरवाँहूँतिरीतरफ़
उसपारकोईघरभीहैअपनाकहूँजिसे
अफ़्सून-ए-इंतिज़ारतमन्नाकानामहै
हुस्न-ए-तलबमेंआरज़ूगोयाकहूँजिसे
  - Ghalib Ahmad
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