mausam badal sake na tire intizaar ke | मौसम बदल सके न तिरे इंतिज़ार के

  - Ghalib Ahmad
मौसमबदलसकेतिरेइंतिज़ारके
अबकेभीदिनगुज़रगएयूँँहीबहारके
ग़म-ख़ेज़-ओ-ग़म-शनासमिरीपुर-शिकोहरात
कबआओगीपहाड़सायेदिनगुज़ारके
आयाहुज़ूर-ए-यारसेशाइ'रकोयेपयाम
आएशराब-ओ-शेरकाचोग़ाउतारके
दिलमेंतिरेउतरसकीमेरीकोईबात
लिक्खेहैंलाखशे'रग़ज़लकेसँवारके
एकमुश्त-ए-ख़ाकबनकेउड़ादिलकाकारवाँ
दश्त-ए-तलबमेंअबभीनिशाँहैंग़ुबारके
  - Ghalib Ahmad
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