shoor-e-nau-umr hooñ na mujh ko mata-e-ranj-o-malaal dena | शुऊर-ए-नौ-उम्र हूँ न मुझ को मता-ए-रंज-ओ-मलाल देना

  - Ehtisham ul Haq Siddiqui
शुऊर-ए-नौ-उम्रहूँमुझकोमता-ए-रंज-ओ-मलालदेना
किमुझकोआतानहींग़मोंकोख़ुशीकेसाँचोंमैंढालदेना
हुदूदमेंअपनीरहकेशायदबचासकूँमैंवजूदअपना
मैंएकक़तराहूँमुझकोदरियाकेरास्तेपरडालदेना
अगरख़लामेंपहुँचगयातोपलटकेवापससकूँगा
तुमअपनीहद्द-ए-कशिशसेऊँचामुझकोयारोउछालदेना
वोसूरतनआदमीहैलेकिनमिज़ाजसेमार-ए-आस्तींहै
अगरउसेआस्तींमेंरखनातोज़हरपहलेनिकालदेना
जानेखिड़कीसेझाँकतीयेकिरनकिसेरास्तादिखादे
तुमअपनेकमरेकीखिड़कियोंपरदबीज़पर्देडालदेना
सुकूत-ए-शबतोड़नेकीख़ातिरभीकोईहंगामासाथरखना
शामहोतेहीहरतमन्नाकोक़ैद-ख़ानेमैंडालदेना
येहमनेमानाकितुममेंसूरजकीसीतपिशहैमगरयेसुनलो
किहमसमुंदरहैंऔरआसाँनहींसमुंदरउबालदेना
  - Ehtisham ul Haq Siddiqui
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